अंडमान सागर में सोमवार को धरती तीन बार कांप उठी। महज तीन घंटे के अंदर तीन भूकंप दर्ज किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (एनसीएस) के मुताबिक, सबसे तेज झटका दोपहर 12.06 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.7 रही। लगातार आ रहे भूकंप के झटकों ने इलाके की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
सोमवार सुबह अंडमान सागर में पहला भूकंप 10:09 बजे आया। NCS के अनुसार, इसकी तीव्रता 4.7 मापी गई। यह भूकंप समुद्र के भीतर 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। भूकंप का केंद्र 9.43 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 94.17 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। स्थानीय लोगों ने हल्का कंपन महसूस किया, हालांकि किसी नुकसान की कोई खबर नहीं है।
दूसरा झटका सिर्फ एक घंटे बाद
पहले झटके के ठीक एक घंटे बाद, 11:22 बजे फिर से धरती कांपी। इस बार भूकंप की तीव्रता 4.6 रही। भूकंप समुद्र में ही 10 किलोमीटर गहराई पर आया। इसका केंद्र 9.45 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 93.93 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। लगातार दो झटकों से लोग सतर्क हो गए।
कुछ देर बाद फिर 4.7 तीव्रता का झटका
दोपहर 12:06 बजे तीसरा बड़ा भूकंप आया। इसकी तीव्रता भी 4.7 मापी गई। भूकंप का केंद्र फिर से अंडमान सागर में ही 10 किलोमीटर गहराई पर रहा। एनसीएस ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की। लगातार तीन भूकंप आने से प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
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पिछले हफ्ते भी आया था भूकंप
इससे पहले 25 जून को भी अंडमान सागर में भूकंप आया था। तब इसकी तीव्रता 4.2 मापी गई थी और गहराई 20 किलोमीटर थी। लगातार भूकंप आने से यह साफ है कि क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट्स में हलचल तेज हो गई है।
क्यों आते हैं अंडमान में बार-बार भूकंप?
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह सिस्मिक जोन-5 में आता है, जो भारत का सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र है। इसके अलावा यह क्षेत्र 'अल्पाइन-हिमालयन सिस्मिक बेल्ट' का हिस्सा है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय इलाकों में से एक है। समुद्र के भीतर प्लेटों की हलचल और तनाव बढ़ने पर अक्सर इस इलाके में भूकंप आते हैं। यही वजह है कि अंडमान सागर में बार-बार धरती कांपती है।
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