प्रशांत महासागर में रिंग ऑफ फायर सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित क्षेत्र।।
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वाशिंगटन विवि के भूकंप वैज्ञानिकों ने चेताया, यह घटना वहां घटी, जो इतिहास में विनाशकारी भूकंपों के लिए कुख्यात है। हालांकि इससे पहले 1952 में इसी क्षेत्र में 9.0 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था, परंतु वैज्ञानिकों का अनुमान था कि अगली बड़ी दरार सदी के अंत तक ही फटेगी। हालांकि इस बार समुद्री सुनामी की लहरें आशंका से कम घातक रहीं, लेकिन आफ्टरशॉक्स का सिलसिला अब तक जारी है और क्षेत्र में खतरा अभी टला नहीं है। समुद्रतटीय इलाकों में दहशत है। आफ्टरशॉक्स से पेसिफिक रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में समुद्री लहरें अब भी रुक-रुक कर रौद्र रूप धारण कर रही हैं। रिंग ऑफ फायर एक विशाल टेक्टोनिक बेल्ट है जो दक्षिण अमेरिकी तटों से उत्तरी अमेरिका, जापान, फिलीपीन, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड व रूस के कामचटका तक फैला है।
भारत के लिए सबक, हाई-रिस्क जोन
- कामचटका का यह मेगाक्वेक भारत के लिए भी एक गंभीर सबक है। यहां तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह सुनामी व भूकंप के लिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माने जाते हैं।
- अंडमान-निकोबार सबडक्शन जोन : मेगाथ्रस्ट भूकंप और सुनामी के लिहाज से सबसे संवेदनशील।
- पूर्वी तट तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल 2004 की तरह पुनः सुनामी की चपेट में आ सकते हैं।
- हिमालयन फॉल्ट लाइन : उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, कश्मीर और असम में बड़े भूकंपों की संभावना बनी रहती है।