अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में सुधार हो रहा है। इससे पहले भी वैज्ञानिकों ने ओजोन परत में सुधार के संकेत देखे थे, लेकिन यह पहला अध्ययन है जो यह साबित करता है कि यह रिकवरी मुख्य रूप से हानिकारक रसायनों में आई गिरावट के कारण हुई है। इसमें जलवायु परिवर्तन या मौसम के बदलाव की कोई भूमिका नहीं है।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि यह इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक स्तर पर उठाए गए कदम जिनका उद्देश्य ओजोन हानिकारक रसायनों को कम करना था, प्रभावी साबित हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर में प्रकाशित हुए हैं।एमआईटी की प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता सुसान सोलोमन का कहना है कि इस बात के ठोस प्रमाण मिले हैं कि अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में सुधार हो रहा है। यह पहली बार है जब 95 फीसदी विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि ओजोन छिद्र भर रहा है जो एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
लगातार सुधार जारी
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भी पुष्टि की है कि ओजोन परत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने इस सुधार में अहम भूमिका निभाई है।
समताप मंडल में स्थित है ओजोन परत
पृथ्वी के चारों ओर विभिन्न गैसों से बना वायुमंडल कई परतों में विभाजित है। सतह से दूसरी परत जिसे समताप मंडल (स्ट्रेटोस्फीयर) कहा जाता है, में 15 से 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओजोन गैस घनी मात्रा में पाई जाती है। यह वायुमंडल में मौजूद कुल ओजोन का लगभग 90 फीसदी हिस्सा बनाती है। यह परत सूर्य से आने वाली पराबैंगनी (यूवी) किरणों को अवशोषित कर पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।