विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने वुहान से भारतीयों को निकालकर लाने में सरकार के प्रयासों की सराहना की। नई दिल्ली में रविवार को तमिल एसोसिएशन के कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने राजनीति में आने की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि मेरे राजनीति में शामिल होने की एक वजह यह है कि मैंने इस सरकार को सुधारों के बारे में बात करते देखा। पहली बार, हमारे पास एक सरकार है जिसके लिए सुधार का मतलब है पोषण, लड़की की शिक्षा, मध्यवर्गीय के लिए सेवाएं। तब मुझे लगा कि मुझे भी सुधार लाने में योगदान देना चाहिए।
जयशंकर ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार को वुहान के कोरोनोवायरस प्रभावित चीनी शहर से 600 से अधिक भारतीयों को निकालने के प्रयासों की सराहना की और कहा कि भारत दुनिया में कहीं भी परेशान भारतीयों तक पहुंचने की अपनी जिम्मेदारी को समझता है।
बता दें कि एस जयशंकर, चीन और अमेरिका के साथ बातचीत में भारत के प्रतिनिधि भी रह चुके हैं। जयशंकर अमेरिका और चीन में भारत के राजदूत के पदों पर भी काम कर चुके हैं। 1977 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी जयशंकर ने लद्दाख के देपसांग और दोकलाम गतिरोध के बाद चीन के साथ संकट को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जयशंकर सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त और चेक गणराज्य में राजदूत पदों पर भी काम कर चुके हैं।