विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट याचिका (अदालत पार्टी को सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं कर सकती है) दायर की है। याचिका में कहा गया है कि अगर अदालत जुलाई में गुजरात से राज्यसभा के लिए उनके चुनाव को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेताओं द्वारा दायर किसी भी याचिका पर सुनवाई करती है, तो पहले उन्हें सुना जाए।
इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने एस जयशंकर के राज्यसभा चुनाव को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेता की याचिका को खारिज कर दिया था। राज्यसभा के भाजपा उम्मीदवार जयशंकर के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार गौरव पांड्या ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने राज्यसभा की दो सीटों के लिए जुलाई 2019 में हुए चुनाव में दो सीटों के अलग-अलग चुनाव कराए, जिससे सत्ताधारी दल के पास बहुमत होने के कारण दोनों सीटों पर उनके उम्मीदवारों की जीत हुई।
पिछले दिनों गुजरात हाईकोर्ट ने जयशंकर और जुगल ठाकुर के निर्वाचन को चुनौती देने वाली अर्जी खारिज कर दी थी। कांग्रेस का दावा है कि दोनों सीट पर एक साथ चुनाव होते तो कांग्रेस को एक सीट मिल सकती थी। गुजरात हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता जनप्रतिनिधि कानून के तहत चुनाव को अमान्य घोषित करने के कारणों को बताने में नाकाम रहे। कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता संविधान या जनप्रतिनिधि कानून का कोई ऐसा प्रावधान भी बताने में असफल रहे, जिसमें चुनाव आयोग को सभी रिक्तियों के लिए एक साथ चुनाव कराने की बाध्यता है।
क्या होती है कैविएट
कैविएट का मतलब है ऐसी याचिका जिसमें याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बिना अदालत अपना फैसला नहीं दे सकती है। यह कैविएट उच्चतम और उच्च न्यायालय में दाखिल की जाती हैं। कैविएट उस परिस्थिति में दाखिल किया जाता है जब याचिकाकर्ता को ऐसा पूर्वानुमान हो कि दूसरा पक्ष उसकी याचिका को चुनौती दे सकता या फिर उसे अदालत से खारिज करवा सकता है।