विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की। यह उच्च-स्तरीय वार्ता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जवाबी टैरिफ के एलान के बाद पहली बार हुई है। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर बातचीत के बारे में जानकारी दी।
जयशंकर ने एक्स पर बताया कि इस बातचीत में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने पर सहमति बनी। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने और रूबियो ने हिंद-प्रशांत, भारतीय उप महाद्वीप, यूरोप, पश्चिम एशिया और कैरेबियाई देशों के मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण का आदान-प्रदान किया।
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उन्होंने कहा, आज विदेश मंत्री रूबियो से बात करके अच्छा लगा। हमने हिंद-प्रशांत, भारतीय उपमहाद्वीप, यूरोप, पश्चिम एशिया और कैरेबियाई देशों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। हम दोनों इस बात पर सहमत हुए कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द पूरा करना जरूरी है। आगे भी संपर्क में रहने को लेकर सहमत हुए।
भारत और अमेरिका वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फरवरी में वाशिंगटन में हुई बैठक के बाद दोनों पक्षों ने 2025 के शरद ऋतु तक पहले चरण के व्यापार समझौते पर बातचीत करने का फैसला लिया था।
पिछले महीने अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच ने भारत का दौरा किया और भारतीय अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को मजबूत करने पर चर्चा की थी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत उन देशों और साझेदारों पर जवाबी टैरिफ लगाने का एलान किया है, जो अमेरिका से आयातित सामान पर उच्च शुल्क लगाते हैं। ट्रंप प्रशासन का मकसद व्यापार घाटे को कम करना और निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना है।
भारत पर अमेरिका ने 26 फीसदी टैरिफ लगाया है, जो पहले से लागू शुल्क के ऊपर होगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत अमेरिकी सामानों पर अधिक टैरिफ लगाता है और इसलिए यह शुल्क लगाया गया है।
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