दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, 'हम निश्चित रूप से एक अस्थिर और अनिश्चित दौर में जी रहे हैं, जहां हमने कोविड महामारी, कई संघर्षों (जिनमें से कई अभी भी जारी हैं) और व्यापार में उथल-पुथल के लगातार प्रभावों का अनुभव किया है। जिन देशों की घरेलू मांग मजबूत रही है, उनका प्रदर्शन बेहतर रहा है और आगे भी ऐसा ही होता रहेगा। और ऐसी स्थिति में मजबूत पर्यटन के महत्व को शब्दों में बयां करना मुश्किल है।'
ई-वीजा ने यात्रा को सुखद बनाया- जयशंकर
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, 'ई-वीजा की प्रथा ने भारत की यात्रा को और भी सुखद बना दिया है। दुनिया के लिए भारत का संदेश स्पष्ट रूप से ज्यादा मजबूत है, लेकिन इसके साथ ही भारत में यात्रा करना भी बहुत आसान हो गया है। पिछले एक दशक में हमारे हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है। रेलवे में भी काफ़ी बदलाव आया है। पहुंच और गुणवत्ता, दोनों ही दृष्टि से बदलाव। राजमार्गों में फिर से नाटकीय बदलाव आया है।'
इस दौरान विदेश मंत्री ने कहा, 'यह साल फिल्म शोले की 50वीं वर्षगांठ है। मैं वास्तव में उस जगह गया था, जो गब्बर सिंह का ठिकाना था। मैंने वहां एक रिसॉर्ट देखा क्योंकि आज पर्यटन इस हद तक बढ़ गया है कि लोग वास्तव में उन फिल्मों को फिर से जीने की कोशिश करते हैं जो उनके लिए उनकी युवावस्था की यादगार यादें हैं।'
'अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होना आवश्यक'
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने आगे कहा, 'अनिश्चितता के समय में अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होना आवश्यक है। आत्मनिर्भरता, निस्संदेह, वैश्विक उथल-पुथल से निपटने की मानसिकता है। लेकिन यह हमारे आत्मविश्वास को मजबूत करने, हमारी लचीलापन बढ़ाने और विकसित भारत की नींव रखने का आधार भी है।' 'हम एक सभ्य राष्ट्र हैं, एक ऐसा समाज जिसने समय की कसौटी पर खरा उतरा है और अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को पोषित किया है। हमारी असली ताकत हमारे लोग और उनका आत्मविश्वास रहे हैं। हमने प्रतिकूलताओं पर विजय प्राप्त की है और प्रगति एवं समृद्धि की यात्रा में हमने कई चुनौतियों का सामना किया है। हमारे पास गर्व करने के लिए बहुत कुछ है और दुनिया के साथ साझा करने के लिए भी बहुत कुछ है... हालांकि हमें इस तरह के खुलेपन से हमेशा लाभ होगा, लेकिन अप्रत्याशितता के समय में अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होना आवश्यक है। आत्मनिर्भरता, निस्संदेह, वैश्विक उथल-पुथल से निपटने की मानसिकता है। लेकिन यह यह हमारे आत्मविश्वास को मजबूत करने, हमारी लचीलापन बढ़ाने और विकसित भारत की नींव रखने का आधार है।'
अगले हफ्ते रूस जाएंगे विदेश मंत्री
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले हफ्ते रूस की राजधानी मॉस्को जाएंगे, जहां वे अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से अहम बातचीत करेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में थोड़ी खटास आ गई है। जयशंकर का यह दौरा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की हालिया रूस यात्रा के कुछ दिन बाद हो रहा है। डोभाल ने मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और कई शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान पुतिन के भारत दौरे की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। रूस के विदेश मंत्रालय के उप-प्रवक्ता अलेक्सी फडेयेव ने कहा है कि दोनों देशों के विदेश मंत्री द्विपक्षीय संबंधों के 'सबसे अहम मुद्दों' पर चर्चा करेंगे। जयशंकर दो दिन रूस में रहेंगे। इस दौरान वे न केवल लावरोव के साथ विस्तृत बातचीत करेंगे, बल्कि संभव है कि राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात करें। वे भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। इस आयोग में व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान-तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर बात होती है। रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव करेंगे।