लंदन में विदेश मंत्री डॉ जयशंकर
- फोटो : एएनआई वीडियो ग्रैब
फिलहाल अमेरिकी डॉलर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता का स्रोत
अमेरिकी मुद्रा डॉलर के बदले किसी और मुद्रा में व्यापार की संभावना को लेकर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने साफ किया कि भारत की ऐसी कोई मंशा नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि डॉलर को बदलने के लिए हमारी ओर से कोई नीति है। जैसा कि मैंने कहा, आखिरकार, रिजर्व मुद्रा के रूप में डॉलर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता का स्रोत है।' मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए आज जो आवश्यक है, उसका रणनीतिक मूल्यांकन करने के बाद इस बारे में हमारी समझ बेहतर होगी। वास्तव में इस मामले पर बेहतर समझ ही हमारी सोच (भारत की नीति) को भी निर्देशित करेगी।
आर्थिक प्रणाली को मजबूत करना सबकी प्राथमिकता हो...
बकौल डॉ जयशंकर 'अभी, हम दुनिया में अधिक आर्थिक स्थिरता चाहते हैं... मैं यह भी कहूंगा कि मुझे नहीं लगता कि इस मामले पर ब्रिक्स देशों की कोई एकीकृत स्थिति है। मुझे लगता है कि ब्रिक्स के सदस्य, और अब जबकि हमारे पास और भी सदस्य हैं, सब इस मामले पर बहुत अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं... आज हम मानते हैं कि अमेरिका के साथ काम करना और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली और आर्थिक प्रणाली को मजबूत करना वास्तव में सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए।' बता दें कि ब्रिक्स देशों में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। भारत की पहल पर इस संगठन में कई और देशों को भी शामिल किया गया है।
लंदन में विदेश मंत्री डॉ जयशंकर
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डॉ जयशंकर ने भारत और चीन के रिश्तों पर भी दिया जवाब
भारत चीन के साथ किस तरह का रिश्ता चाहता है? यह पूछे जाने पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, 'हमारे बीच बहुत ही अनोखे रिश्ते हैं। सबसे पहले, हम दुनिया के दो ऐसे देश हैं जिनकी आबादी एक अरब से अधिक है। हम दोनों का इतिहास बहुत पुराना है, जिसमें समय के साथ उतार-चढ़ाव आए हैं। आज, दोनों देश ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं; यही चुनौती है, और हम सीधे पड़ोसी भी हैं। चुनौती यह है कि जैसे-जैसे कोई देश आगे बढ़ता है, दुनिया और उसके पड़ोसियों के साथ उसका संतुलन बदलता है। जब इस आकार, इतिहास, जटिलता और महत्व वाले दो देश समानांतर रूप से आगे बढ़ते हैं, तो वे अनिवार्य रूप से परस्पर क्रिया करते हैं।
सीमा पर अशांति को लेकर क्या असर पड़ेगा?
बकौल डॉ जयशंकर, भारत और चीन के बीच मुख्य मुद्दा यह है कि कैसे एक स्थिर संतुलन बनाया जाए और संतुलन के अगले चरण में पहुंचा जाए। हम एक स्थिर संबंध चाहते हैं, जहां हमारे हितों का सम्मान किया जाए, हमारी संवेदनशीलता को पहचाना जाए। हालात ऐसे बनें जहां दोनों देशों के लिए स्थिति बेहतर हो। वास्तव में हमारे रिश्ते में यही मुख्य चुनौती है। भारत के लिए, सीमा एक महत्वपूर्ण पहलू है। पिछले 40 वर्षों में, यह धारणा रही है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता रिश्ते को बरकरार रखने के साथ-साथ मजबूत बनाने के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, अगर दोनों देसों की सीमा अस्थिर है, शांतिपूर्ण नहीं है, या उसमें शांति का अभाव है, तो यह अनिवार्य रूप से हमारे संबंधों के विकास और दिशा को प्रभावित करेगा।
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