सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर छिड़ी बहस में अब संघ भी कूद गया है। आरएसएस के प्रचार प्रमुख ने कहा कि आरएसएस का एक-एक स्वयंसेवक सर्जिकल स्ट्राइक करने की हिम्मत रखता है। फैसले लेने की क्षमता भी संघ से जुड़कर बढ़ती है। उन्होंने कहा कि लड़ाई शस्त्रों से नहीं बल्कि हिम्मत से होती है।
आरएसएस में ब्रज, मेरठ और उत्तराखंड प्रांत के प्रचार प्रमुख पदम सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि आरएसएस के एक-एक स्वयंसेवक को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जाती है। बगैर हथियार के सामने वाले को किस तरह से परास्त किया जा सकता है इसके टिप्स हम शाखाओं के जरिए सिखाते हैं। चाहे जूडो-कराटे हो या फिर लट्ठ चलाना। हर स्वयंसेवक को बारीकियां सिखाई जाती हैं। आरएसएस से जुड़े रहने वाले हर शख्स में आत्मविश्वास तो कूट-कूटकर भर जाता है। हालात चाहे जो भी हो वह उनका सामना करने को तैयार रहता है।
सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर छिड़े सियासी घमासान पर संघ प्रचारक ने बताया कि फैसला लेना भी बहुत बड़ी चीज होती है। पूरा आपरेशन तो हमारे जवानों ने ही किया है। वह तो सबसे बड़े योद्धा हैं ही लेकिन दुश्मन मुल्क को तत्काल जवाब देने का निर्णय लेने वाला भी किसी विजेता से कम नहीं होता है। आरएसएस जो भी ट्रेनिंग कैंप चलाता है उसमें यही प्रशिक्षण दिया जाता है कि खुद को नुकसान पहुंचाए बगैर दुश्मन को किस तरह से परास्त करना चाहिए।