आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य राकेश मोहन ने याद किया कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह युवा तकनीकी प्रतिभाओं को सरकार में शामिल होने और नीतिगत निर्माण में भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करते थे।
मनमोहन सिंह का कल रात हुआ निधन
भारत के आर्थिक सुधारों के निर्माता मनमोहन सिंह का गुरुवार रात 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जब 1991 में सिंह ने वित्त मंत्रालय की बागडोर संभाली, तब भारत का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 8.5 प्रतिशत के करीब था, भुगतान संतुलन घाटा बहुत बड़ा था और चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत के करीब था। हालात को बदतर बनाने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार केवल दो सप्ताह के आयात के भुगतान के लिए ही पर्याप्त था, जो दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में थी। ऐसे मौके पर सिंह की ओर से प्रस्तुत केंद्र य बजट 1991-92 के बाद नए आर्थिक युग की शुरुआत हुई।
कौन-कौन हैं परिवार में?
यह स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसमें साहसिक आर्थिक सुधार हुए, लाइसेंस राज का उन्मूलन हुआ और कई क्षेत्रों को निजी और विदेशी खिलाड़ियों के लिए खोला गया ताकि पूंजी का प्रवाह हो सके। सिंह लगातार दो कार्यकालों 2004-09 और 2009-14 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उनके परिवार में पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं।
'भारत की नीति निर्माण में बड़ा योगदान'
भारतीय रिजर्व बैंक के उप गवर्नर रहे राकेश मोहन ने कहा कि सिंह नए विचारों के प्रति हमेशा संवेदनशील रहते थे और युवा लोगों से आने वाले सुझावों को महत्व देते थे। उन्होंने कहा, 'भारत की नीति निर्माण में उनका एक बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने कई युवा आर्थिक सलाहकारों को सरकार में शामिल किया, जिनमें मोनटेक सिंह आहलूवालिया, मैं, शंकर आचार्य और अरविंद वीरमानी शामिल हैं।'
चार नीति समितियां की थीं स्थापित: मोहन
राकेश मोहन ने मनमोहन सिंह के साथ अपने पहले अनुभव को याद करते हुए कहा कि उस समय वह केवल 32-33 वर्ष के थे और योजना आयोग के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में लंबे समय के बाद भारत वापस आए थे। सिंह उस समय योजना आयोग के सदस्य सचिव थे और वह उन्हें पूरी तरह से नहीं जानते थे। उन्होंने बताया कि सिंह ने उन्हें सरकार में आने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए नीति निर्माण के लिए शहरी आवास और शहरी विकास पर चार नीति समितियां स्थापित करने की अनुमति दी, जो उन्होंने दो वर्षों तक संभालीं।
आर्थिक मामलों के सचिव और मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके मोहन ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह विनम्र थे और हमेशा इस बात में रुचि रखते थे कि दुनिया और देश में क्या चल रहा है।