सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा न्यायपालिका के खिलाफ मोर्चा खोलने के एक दिन बाद ही वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने लोया केस की सुनवाई कर रहे जज अरुण मिश्रा पर आरोप लगाए हैं। दवे का कहना है कि मिश्रा के भाजपा और बड़े नेताओं के साथ करीबी रिश्ते हैं।
एक समाचार चैनल पर दवे ने कहा- हर किसी को पता है कि जस्टिस अरुण मिश्रा के भाजपा और बड़े नेताओं के साथ संबंध हैं। वो लोया केस की सुनवाई नहीं करेंगे। इसी बीच सीबीआई के विशेष जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत के मामले में याचिका दायर करने वाले एक याचिकाकर्ता का कहना है कि दवे ने उनपर जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच से केस वापस लेने के लिए दबाव डालने की कोशिश की थी।
लोया केस के याचिकाकर्ता और कांग्रेस नेता तहसीम पूनावाला का कहना है कि वरिष्ठ वकील दवे ने उनपर सुप्रीम कोर्ट की पीठ से केस वापस लेने का दबाव बनाया था। उन्होंने पूनावाला को यह समझाने की कोशिश की कि जस्टिस मिश्रा सीजेआई के अनुयायी हैं इसलिए वो इस केस की सुवनाई नहीं करेंगे। तहसीम का कहना है कि पहले दवे उनके केस के वकील बनने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन जब उन्हें पता चला कि मिश्रा इसके जज हैं तो उन्होंने केस को सुप्रीम कोर्ट से वापस लेने के लिए कहा।