कोविड-19 के प्रसार को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वादियों और वकीलों को कोर्ट में मौजूद रहने पर रोक लगा दी थी। इसके दो दिन बाद देशभर में लॉकडाउन लागू हुआ था। सामान्य समय में, शीर्ष अदालत औसतन एक महीने में करीब 3500 मामलों का निपटारा करता है। लॉकडाउन के दौरान दो-तीन पीठें ही वर्चुअल कोर्ट रूम में ‘तत्काल’ मामलों की सुनवाई कर रही हैं जबकि सामान्य समय में 16 पीठ ऐसा करती थीं। 23 मार्च से 24 अप्रैल के बीच 17 कार्यदिवस के दौरान 87 पीठों ने 593 मामलों की सुनवाई की।
उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 84 समीक्षा याचिकाओं का निपटारा किया। 87 पीठों में से 37 ने बड़े मामलों की सुनवाई की जबकि 53 पीठों ने स्थगन के लिए समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई की। 390 बड़े मामलों में से 203 संबंधित मामले थे। इनकी सुनवाई इस दौरान की गई। जिन 215 मामलों में फैसला दिया गया, उनमें से 174 संबंधित मामले थे।
वकीलों की ओर से पेश आई तकनीकी समस्या
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान वकीलों आई तकनीकी दिक्कत पर सुप्रीम कोर्ट के एक सूत्र ने बताया कि यह समस्या वकीलों के कार्यालयों या आवासों पर इंटरनेट कनेक्टविटी के चलते आई। उन्होंने कहा कि जो जज अपने आवासों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामलों की सुनवाई कर रहे थे, उन्हें 100 एमबीपीएस तक की इंटरनेट स्पीड मुहैया कराई गई और इसके चलते उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। सूत्र ने कहा कि कई वकील सुनवाई के लिए अपने मोबाइल फोन या टेबलेट के जरिए पेश हुए और अन्य कॉल आने पर उनका संपर्क टूट गया।
पिछले साल 10 महीने में 34653 मामलों का हुआ था निपटारा
सुप्रीम कोर्ट की वार्षिक रिपोर्ट 2018-19 के अनुसार, पिछले साल जनवरी और अक्तूबर के बीच 34653 मामलों का निपटारा किया गया। औसतन हर माह यह आंकड़ा 3465 होता है।