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रक्षाबंधन से लौटी दंगा पीड़ित क्षेत्रों में उम्मीद, ठहरे हाथों को मिलने लगा काम

Sun, 26 Jul 2020 09:23 PM IST
मुकेश कुमार झा अमित शर्मा, नई दिल्ली

सार

  • रक्षाबंधन पर धीरे-धीरे गर्म हो रहा बाज़ार, बढ़ रही लोगों की भीड़    
  • बाजारों में शारीरिक दूरी मेंटेन करना मुश्किल, बिगड़ सकते हैं हालात  

 
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राखी की दुकान - फोटो : social media
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विस्तार
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फरवरी-मार्च में उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। इसका सबसे बड़ा नुक्सान सीलमपुर, भजनपुरा, सोनिया विहार, खजूरी, शास्त्री पार्क, मौजपुर, गोकुलपुरा और गांधी नगर में रहने वाले लोगों को उठाना पड़ा था। दंगों के तुरंत बाद आई कोरोना की मुश्किल ने लोगों पर दोहरा वार किया। पहले जमा पूंजी दंगों में खाक हो गई तो बाद में कामकाज ठप होने से लोग भुखमरी के कगार पर आ गए। लेकिन अब धीरे-धीरे बाजार खुल रहा है और ठहरे हाथों को काम मिलना शुरू हुआ है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले त्योहारी सीजन में स्थिति कुछ अनुकूल होगी और उनकी जिंदगी पहले से बेहतर हो सकेगी।

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यहां बनती हैं राखियां
लक्ष्मी नगर में राखियां बेच रहे व्यवसायी बबलू के मुताबिक दिल्ली के इन्हीं दंगा प्रभावित क्षेत्रों में छोटी-छोटी फैक्ट्रियों में होजरी के कपड़े, मोज़े, जीन्स, पैंट-शर्ट, तौलिये, कढ़ाई, सजावट के सामान बनते हैं। त्योहारी सीजन के मुताबिक़ इन्हीं जगहों पर कभी राखी बनाने का काम होता है तो कभी दिवाली के गिफ्ट/पैकिंग और सजावट से जुड़े सामान बनाने का। इस समय यहां राखियां बनाने का काम चल रहा है।

यूपी-बिहार से आए गरीब मजदूर परिवारों की महिलाएं और बच्चे इन्हीं फैक्ट्रियों में काम कर अपने लिए कुछ आय कर लेते हैं। पिछले चार महीने से यहां सारा कामकाज ठप पड़ा था। लेकिन अब कामकाज शुरू होने से यहां के लोगों में रौनक लौटने लगी है। आगे आने वाले समय में त्योहारी सीजन में इन्हें कुछ बेहतर व्यापार की उम्मीद है।
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राखियों के विक्रेता मोहम्मद जुनैद के मुताबिक अभी भी बाज़ार में बहुत तेजी नहीं है, लेकिन शुरुआत होती दिख रही है। स्थिति को देखते हुए अभी भी मजदूर अपने घरों से वापस नहीं आये हैं, लिहाजा उनकी फैक्ट्रियों में अभी भी बेहद सीमित संख्या में लोगों से काम चलाना पड़ रहा है।  

10 रूपये से 100 रूपये तक की राखियां
मोहम्मद जुनैद के मुताबिक पहले स्पंज लगी ऊंची-ऊंची राखियां फैशन में थीं, लेकिन अब रेशमी धागों से बनी राखियां लोग ज्यादा पसंद करते हैं। ॐ, स्वस्तिक और शुभलाभ अंकित राखियां लोगों को काफी पसंद आ रही हैं। रूद्राक्ष का आभास देती मनकों की राखियां 20 रूपये से लेकर 50 रूपये तक में उपलब्ध हैं।

बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए बाज़ार में इलेक्ट्रोनिक राखियां भी उतारी गई हैं। इनमें अलग-अलग रंगों की लाइट्स जलती हैं जो बच्चों को बहुत पसंद आती हैं। इसके साथ ही कुछ राखियों में लाइट्स के साथ म्यूजिक भी बजते हैं जो बच्चों को खूब पसंद आ रहे हैं। इनकी कीमत 50 से सौ रूपये तक है।

 सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं
कोरोना संक्रमण के कारण अब तक लोग बाज़ार में निकलने से डरते रहे हैं, लेकिन रक्षाबंधन के करीब आते ही बाज़ार में लोगों की भीड़भाड़ बढ़ती दिख रही है। राखियों की दुकानों पर महिलाओं की काफी भीड़ देखि जा रही है। इस दौरान कुछ लोग मास्क लगाए हुए तो कुछ बिना मास्क के भी दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में कोरोना का अचानक फैलाव बढ़ सकता है जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सरकार और प्रशासन लगातार लोगों से मास्क पहनने और शारीरिक दूरी बनाये रखने की अपील कर रहे हैं।

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