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Global Warming: समुद्र तल की ऊंचाई बढ़ने से आबादी के सामने गंभीर संकट, क्या इस खतरे को रोक सकती है दुनिया?

अमित शर्मा
Updated Fri, 17 Feb 2023 03:05 PM IST

सार

Global Warming: भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, नीदरलैंड्स और चीन की बड़ी आबादी भी प्रभावित होगी। बड़ी आशंका यह है कि समुद्र तटीय क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से लोग सुरक्षित क्षेत्रों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर होंगे। इससे दूसरे क्षेत्रों में भी साफ पानी, आवास और भोजन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ेगा...
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global warming - फोटो : Agency (File Photo)


भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, नीदरलैंड्स और चीन की बड़ी आबादी भी प्रभावित होगी। बड़ी आशंका यह है कि समुद्र तटीय क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से लोग सुरक्षित क्षेत्रों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर होंगे। इससे दूसरे क्षेत्रों में भी साफ पानी, आवास और भोजन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ेगा। इससे कई देशों के सामने सामना न कर सकने योग्य परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

पेरिस जलवायु समझौते में विश्व के देश तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक करने पर सहमत हुए हैं। यह लक्ष्य हासिल कर पाना भी आसान नहीं है क्योंकि बढ़ती आबादी के कारण ऊर्जा की बढ़ती खपत तापमान पर वृद्धि का दबाव बनाएगी, इसके बाद भी यदि वैश्विक तापमान बढ़ने को 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक रोक भी लिया जाए तो भी अनुमान है कि अगले 2000 वर्ष में समुद्र के जलस्तर में औसतन दो से तीन मीटर तक की वृद्धि हो जाएगी। यह वृद्धि भी अरबों लोगों के जीवन को गंभीर संकट में डालने के लिए पर्याप्त होगी। इस शताब्दी के अंत तक ही जलस्तर में आधे मीटर से कुछ अधिक की वृद्धि हो सकती है, जो इस त्रासदी की एक बड़ी झलक दिखाने की शुरुआत कर सकती है।

हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र तल में यह ऊंचाई अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग हो सकती है। इससे इन क्षेत्रों में पड़ने वाले सीधे प्रभाव भी कम-अधिक होंगे। लेकिन इसके दूरगामी असर से दुनिया का कोई क्षेत्र अछूता नहीं रहेगा। इसलिए पर्यावरण विशेषज्ञ सभी देशों और समुदायों से इस त्रासदी को टालने में साथ आने की अपील कर रहे हैं।

क्या इस त्रासदी को रोकने में सक्षम है दुनिया?

ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. अजय शंकर ने अमर उजाला से कहा कि दुनिया की आबादी लगातार बढ़ रही है। बढ़ती आबादी के लिए भोजन, आवास, कपड़े और अन्य सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती लगातार बढ़ती रहेगी। इन सभी वस्तुओं के उत्पादन में ऊर्जा का प्रयोग होगा और ऊर्जा की खपत से प्रदूषण और तापमान में वृद्धि होगी। चूंकि, ऊर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में अभी भी जीवाश्म ईंधन प्रमुख बने हुए हैं, प्रदूषण और तापमान की वृद्धि रोकना मुश्किल है।

दुनिया के तमाम देशों की पहल से हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिला है। सौर ऊर्जा की खपत तेजी से दुनिया में लोकप्रिय हो रही है। भारत जैसे देशों ने अपनी कुल ऊर्जा खपत का 70 फीसदी हिस्सा सौर ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और हम तेजी से इस लक्ष्य को हासिल करने की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन दुनिया के अनेक देश उत्पादन कम होने की डर और तकनीकी संसाधनों की कमी से सौर ऊर्जा को तेजी से नहीं अपना रहे हैं। सच्चाई यह है कि सौर ऊर्जा के बड़े प्रचार के बाद भी कोयला और डीजल पेट्रोल की वैश्विक खपत लगातार बढ़ रही है। इससे तापमान की वृद्धि बनी रहेगी। हालांकि, इसके बढ़ने की दर कम होगी। यदि सभी देश इस संकट से निपटने के लिए एकजुट हों और ईमानदारी से सौर ऊर्जा माध्यम को अपनाएं तो इस त्रासदी को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

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