फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजा के शराब पीने के कारण मदन मोहन मालवीय ने छोड़ी थी संपादक की कुर्सी, वाकया कर देगा हैरान

Wed, 25 Dec 2019 06:47 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
Banaras Hindu University - फोटो : AmarUjala
विज्ञापन

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय अपने सिद्धातों के बेहद पक्के माने जाते थे। वे एक बार जो ठान लेते थे, उससे कभी पीछे नहीं हटते थे। कहा जाता है कि अपने छात्र जीवन से ही वे अपने ज्ञान के कारण लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बने रहते थे। उनके प्रशंसकों में कालाकांकर के नरेश भी हुआ करते थे। वे उन दिनों 'हिंदुस्थान' नाम से एक समाचार पत्र निकाला करते थे। वे चाहते थे कि मदन मोहन मालवीय इस पत्र का संपादन कार्य संभाल लें।

विज्ञापन


जब यह संदेश मदन मोहन मालवीय के पास पहुंचा, तो उन्होंने राजा के सामने एक शर्त रख दी। उन्होंने शर्त रखी कि राजा साहब उनसे कभी भी शराब पीकर बात नहीं करेंगे। राजा ने उनकी यह बात मान ली। मदन मोहन मालवीय के संपादन में हिंदुस्थान खूब चमका और जल्दी ही उस समय के सबसे प्रमुख समाचार पत्रों में गिना जाने लगा।

काफी समय तक राजा ने अपना वचन निभाया। लेकिन एक दिन उन्होंने मदन मोहन मालवीय की शराब न पीकर बात न करने वाली शर्त का उल्लंघन कर दिया। नरेश के व्यवहार से दुखी मदन मोहन मालवीय ने उसी समय हिंदुस्थान समाचार पत्र के संपादक पद से इस्तीफा दे दिया। कहा जाता है कि नरेश ने अपनी गलती के लिए मालवीय जी से काफी भी मांगी, लेकिन बात के पक्के मदन मोहन मालवीय ने उनकी एक नहीं सुनी और अपने इस्तीफे पर अड़े रहे।
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक कालाकांकर के नरेश ने मदन मोहन मालवीय के सामने एक शर्त रख दी। उन्होंने कहा कि आपका इस्तीफा तभी स्वीकार किया जाएगा, जब आप हमारे खर्च पर वकालत की पढ़ाई करना स्वीकार कर लेंगे। मालवीय जी ने राजा की यह बात मान ली। उन्होंने वकालत की डिग्री ली वकालत का पेशा शुरू कर दिया। वे जल्दी ही अपने समय के सबसे ऊंचे वकीलों में गिने जाने लगे। इस पेशे से उन्होंने काफी धन कमाया। बताया जाता है कि वे कभी झूठा केस नहीं लड़ते थे और ऊंचे वकील होने के बाद भी गरीबों के केस मुफ्त में लड़ते थे।

मदन मोहन मालवीय पर शोध कर चुके नरेंद्र सहगल ने बताया कि वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सबसे भीख मांगते थे। इसके लिए उन्होंने हैदराबाद के निजाम तक को नहीं छोड़ा। उनके बार-बार इनकार के बाद भी उनके पास जाते रहे और अंततः विश्वविद्यालय के लिए चंदा एकत्र करके ही माने। अपने इस रुख के कारण लोग उन्हें अनुपम भिखारी भी कहते थे।

तैयार हो रहा मालवीय वांग्मय

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों का एक दल इस समय मदन मोहन मालवीय के जीवन के सभी कार्यों को एकत्र कर उसे एक वांग्मय के रुप में प्रकाशित करने पर काम कर रहा है। इस पर लगातार काम चल रहा है। इसके लिए मालवीय जी से जुड़े देश-विदेश से दस्तावेज जमा किये जा रहे हैं। कुछ ही समय के पश्चात सामान्य जनता के सामने इसका विमोचन किया जाएगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें