पीएम नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार कालेधन पर सख्ती तो दिखाई रही है, अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी पीएम मोदी की इस मुहिम में साथ देने जुट गया है। इसलिए कई भारतीय अपनी अघोषित संपत्ति को लेकर बेचैन हैं और उसे ठिकाने लगाने में जुट गए हैं।
कालेधन वालों में इसलिए बेचैनी हैं, क्योंकि जनवरी 2018 तक यूएई अपने बैंकों में इंडियन के अकाउंट्स के जानकारी भारत सरकार को साझा करने लगेगा। गौरतलब है कि खाड़ी देश में भारतीयों के लिए अपनी अघोषित संपत्ति ठिकाने लगाने के लिए मुफीद जगह मानी जाती है।
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, विदेशी बैंक अकाउंट की सूचना नहीं देनेवाले कई भारतीय कार्रवाई से बचने के लिए 'इंश्योरेंस रैपर्स' की मदद ले रहे हैं। वैसे भी अब यूएई के बैंक ज्यादा छानबीन करने लगे हैं। ऐसे में अघोषित संपत्ति वालों में डर पैदा हो गया है। कंपनियों के लिए अकाउंट्स खोलने के लिए दुबई के बैंक भारत की टैक्स आईडी, पासपोर्ट की कॉपियां और कभी-कभार इन कंपनियों में भारतीय शेयरहोल्डरों की मौजूदगी के प्रमाण मांगने लगे हैं।