एनसीबी ने UAE से कथित ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत वापस लाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बड़ी उपलब्धि बताया। बसोया पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट चलाने का आरोप है। सरकार ने 2026-2029 के लिए तीन साल की राष्ट्रीय ड्रग-विरोधी योजना भी तैयार की है, जिसमें 40 से अधिक मंत्रालय और विभाग मिलकर प्रवर्तन, खुफिया तंत्र, रोकथाम और पुनर्वास पर काम करेंगे। साथ ही NDPS एक्ट और ड्रग उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स के वर्गीकरण की भी समीक्षा की जा रही है।
विदेश में छिपे तस्करों पर शिकंजा
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और सख्त कार्रवाई के जरिए उनके पूरे नेटवर्क को खत्म कर रही है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने UAE से वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत वापस लाकर नशीली दवाओं के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।
'ड्रग तस्कर कहीं भी छिपें, बचेंगे नहीं'
शाह ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तक की रणनीति अपनाकर अपराधी का पता लगाने के बाद, हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय कानून की लंबी पहुंच से बच नहीं सकते।' गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क और उस इकोसिस्टम को खत्म करना है, जिसके जरिए देश में नशीले पदार्थों की तस्करी और कारोबार को बढ़ावा मिलता है।
बसोया पर सिंडिकेट का मास्टरमाइंड होने का आरोप
NCB के अनुसार, वीरेंद्र सिंह बसोया पर एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। उसके विदेश में छिपे होने के बावजूद भारतीय एजेंसियां लगातार उसके नेटवर्क और गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। बसोया की UAE से भारत वापसी को इसी कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। गृह मंत्री ने इस घटनाक्रम को सरकार की उस नीति का उदाहरण बताया, जिसके तहत विदेशों में शरण लेने वाले ड्रग तस्करों तक भी भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।
ड्रग्स के कारोबार को खत्म करने के लिए 3 साल का प्लान
इस साल जून में अमित शाह ने ड्रग नियंत्रण को लेकर सरकार का विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट-2025 जारी की थी। इन दस्तावेजों के साथ ड्रग तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के उद्देश्य से तीन साल की राष्ट्रीय योजना भी सामने रखी गई थी। शाह ने उस दौरान कहा था कि केंद्र सरकार पूरे नारकोटिक्स इकोसिस्टम के खिलाफ इतनी सख्ती से कार्रवाई करेगी कि इसका असर 'दशकों तक ठीक नहीं हो पाएगा।'
40 से ज्यादा मंत्रालय और विभाग होंगे शामिल
इस तीन वर्षीय योजना का हिस्सा 40 से अधिक मंत्रालय और विभाग हैं। इसका उद्देश्य प्रवर्तन, खुफिया जानकारी, रोकथाम और पुनर्वास जैसे क्षेत्रों में आपसी समन्वय बढ़ाकर देश के पूरे नारकोटिक्स इकोसिस्टम से निपटना है। सरकार की रणनीति में ड्रग तस्करी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के साथ-साथ नशीले पदार्थों की मांग कम करना, नशे के आदी लोगों का पुनर्वास करना और तस्करी में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों पर भी कार्रवाई करना शामिल है।
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NDPS एक्ट की कमियों की भी होगी समीक्षा
अमित शाह ने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट में मौजूद संभावित कमियों की जांच कर रही है। इसके साथ ही ड्रग्स के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के वर्गीकरण की भी समीक्षा की जा रही है। सरकार का जोर कानून को इस तरह मजबूत करने पर है, ताकि ड्रग उत्पादन, तस्करी और वितरण से जुड़े नेटवर्क कानून की कमजोरियों का फायदा न उठा सकें।