चीन के वुहान शहर से फैले कोरोनावायरस की दवा बनाने के लिए दुनियाभर में कोशिशें चल रही हैं। इस बीच अमेरिका में जेनिफर हॉलर नामक एक महिला को इंजेक्शन लगाकर बनाई जा रही दवा का मानव परीक्षण किया गया है। इससे पहले इस्राइल की सरकार ने दावा किया था कि कुछ ही हफ्तों में वह कोरोना से लड़ने वाली दवा तैयार कर लेगी और बाजार में उपलब्ध करा देगी। परंतु बड़ा सवाल यह है कि आखिर दवा कैसे बनाई जाती है, दवा बनाने की पूरी प्रक्रिया क्या है?
क्या है दावे
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवा बनने में करीब दो साल तक का समय लग सकता है। इस वायरस की दवा खोजने के लिए दुनियाभर में युद्धस्तर पर शोधकार्य जारी हैं। पिछले दिनों इस्राइल के द येरूशलम पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उसके देश की सरकार जल्द ही दवा बना लेगी।
इस रिपोर्ट में इस्राइल के द गैलिली रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक के हवाले से कहा गया था कि वह पिछले चार साल से इंफेक्शस ब्रोंकाइटिस वायरस (आईबीवी) की दवा बनाने के लिए शोध कर रहे थे। ब्रोन्कियल बीमारी मुर्गियों में होती है। इसकी दवा तैयार कर ली गई है। वेटनरी इंस्टीट्यूट में प्री-क्लीनिकल ट्रायल के बाद इसे सरकार ने भी पास कर दिया है।
कोरोना के इलाज में कारगर
इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. चेन कट्ज ने बताया था कि उनकी बनाई दवा विशेष प्रकार के वायरस के इलाज में कारगर है। इसमें ऐसे प्रोटीन हैं जो मांसपेशी के ऊतकों में एंटीजेन का निर्माण करते हैं। इससे शरीर में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी तैयार होता है।
उन्होंने कहा था कि आईबीवी की दवा तैयार करने में सफलता हासिल होने के क्रम में कोरोना वायरस पर परीक्षण शुरू किए गए। कोरोना के डीएनए की जांच से पता चला कि यह मुर्गियों में मिलने वाले वायरस से काफी हद तक समानता रखने वाला है। ऐसे में तैयार दवा को अब नए क्रम में रखकर तकनीक परीक्षण कर कोरोनावायरस की दवा तैयार की जा रही है। डॉ. चेन ने कहा कि आने वाले कुछ हफ्तों में यह भी तैयार हो जाएगी और वैज्ञानिक ही इसे बड़े पैमाने पर तैयार करेंगे।