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President: मुकदमों के निपटारे में आएगी तेजी, राष्ट्रपति ने SC में जजों की संख्या बढ़ाकर 37 करने को दी मंजूरी

Sun, 17 May 2026 08:41 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर अब कुल जजों की संख्या 38 होगी। इस फैसले का उद्देश्य लंबित मामलों को तेजी से निपटाना और देश की न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करना है।
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सुप्रीम कोर्ट में बढ़ी जजों की संख्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश की न्याय व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति ने इसके लिए 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026' जारी किया है। इस नए अध्यादेश के लागू होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है।
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बढ़ोतरी क्यों हो रही है?
ध्यान देने वाली बात यह है कि इन 37 जजों में भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल नहीं होंगे। यदि मुख्य न्यायाधीश को भी इसमें शामिल कर लिया जाए, तो अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल स्वीकृत संख्या 38 हो जाएगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करना है। सरकार चाहती है कि आम लोगों को तेजी से न्याय मिले। जजों की संख्या बढ़ने से मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी और वर्षों से अटके हुए केसों का निपटारा जल्दी हो सकेगा।

कानून मंत्री ने दी जानकारी
केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी जानकारी शेयर की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956' में संशोधन करने वाले अध्यादेश को अपनी स्वीकृति दे दी है। यह अध्यादेश केंद्र सरकार के उस फैसले के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिसमें केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों के पद बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
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ये भी पढ़ें: Suprme Court: 'CEC की नियुक्ति में न्यायिक प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं', केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

इससे पहले 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई थी। उस बैठक में 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026' को संसद में पेश करने का फैसला लिया गया था। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ते कामकाज और लंबित मामलों की भारी संख्या को देखते हुए यह कदम उठाना बहुत जरूरी हो गया था। नए जजों की नियुक्ति होने से अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी और सुनवाई में होने वाली देरी को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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इससे पहले 2019 में बढ़ी थी जजों की संख्या
भारत में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा पहला कानून साल 1956 में बना था। इसके बाद समय-समय पर न्यायपालिका की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए जजों की संख्या में बदलाव होते रहे हैं। इससे पहले साल 2019 में जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब इस नए बदलाव को देश की न्यायिक व्यवस्था को सशक्त करने और आम जनता को समय पर न्याय दिलाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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