नोटबंदी के 15वें दिन भी नकदी का सूखा बरकरार रहा लेकिन रबी सीजन को देखते हुए किसानों के लिए सरकार की राहत भरी बौछार जारी है। पुराने नोट बदलने का आखिरी दिन बृहस्पतिवार ही रह गया है। लिहाजा, बैंकों और एटीएम की भीड़ कम करने की कोशिश में सरकार ने किसानों को उधारी पर खाद दिलाने, नाबार्ड के जरिये जिला सहकारी बैंकों तक 21 हजार करोड़ रुपये पहुंचाने और डेबिट कार्ड से सेवा शुल्क माफ करने का फैसला किया है।
आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने बताया कि किसानों को त्वरित उधारी और नकदी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कई और ठोस कदम उठाए गए हैं। वे अब उधारी पर खाद खरीद सकते हैं। किसानों को खेती-बारी के लिए पैसे की कमी नहीं हो, इसलिए नाबार्ड को 21 हजार रुपये का विशेष पैकेज देने का प्रावधान किया गया है। यह राशि जिला सहकारी बैंकों तक पहुंचेगी और फिर किसानों में वितरित की जाएगी।
डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के मकसद से ही रेलवे ने भी ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर सेवा शुल्क माफ कर दिया और टेलीकॉम कंपनियों ने 31 दिसंबर तक मोबाइल बैंकिंग सेवाओं को मुफ्त करने का फैसला किया है। इसके अलावा, सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि किसानों को यदि नकदी या बैंकिंग सेवा उपलब्ध नहीं है तो उन्हें उधार पर खाद बेचे जाएं।
उन्होंने कहा कि लगभग 40 प्रतिशत छोटे किसान सहकारी संस्थाओं से ही फसल कर्ज लेते हैं। लिहाजा प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थाओं के जरिये किसानों तक नकदी पहुंचाने के लिए नाबार्ड जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को 21,000 करोड़ रुपये देगा। किसानों पर राहत की बौछार करते हुए कंपनियों से कहा गया है कि सहकारी संस्थाओं, डीलरों और रिटेलरों तक पहुंचने वाले किसानों से चेक, क्रेडिट और डेबिट कार्ड जैसे सभी तरह के भुगतान स्वीकार किए जाएं। देश में खाद की पर्याप्त आपूर्ति कराई गई है और सरकार ने निर्देश दिया है कि रबी सीजन में किसानों में इसकी निर्बाध बिक्री सुनिश्चित की जाए।
अब उधारी पर भी खाद ले सकते हैं किसान
केंद्रीय खाद मंत्री अनंत कुमार
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केंद्रीय खाद मंत्री अनंत कुमार ने एक बयान में कहा कि सरकार किसानों की जरूरत के मुताबिक किसी समस्या के बगैर खाद मुहैया कराने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। रबी के इस सीजन में गेहूं, दाल और तिलहन की बुआई जोरों पर है। किसानों पुराने 500 के नोट से बीज तो खरीद सकते हैं लेकिन खाद नहीं। लिहाजा उन्हें खाद मुहैया कराने के लिए यह व्यवस्था की गई है।
सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से कहा गया है कि कर्मचारियों और ठेकेदारों को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान किया जाए। इसी तरह ई-वॉलेट के जरिये मासिक लेनदेन दोगुना कर 20 हजार रुपये करने का फैसला किया गया है। दास ने बताया, ‘ये सभी उपाय डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए हैं। इससे किसानों को भी अच्छे मानसून के बीच रबी फसल की बुआई में आसानी होगी।’
उन्होंने कहा, ‘सरकारी बैंकों, कुछ निजी बैंकों और ऐसे कुछ सेवा प्रदाताओं ने डेबिट कार्ड पर 31 दिसंबर 2016 तक सेवा शुल्क नहीं लेने का फैसला किया है।’ रूपे डेबिट कार्ड ने पहले ही स्विचिंग शुल्क माफ कर दिया है। मास्टरकार्ड और वीजा जैसी अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क कंपनियों से ऑपरेट होने वाले अन्य डेबिट कार्ड अभी ट्रांजेक्शन शुल्क ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर बैंकों द्वारा लिया जाने वाला एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) शुल्क और स्विचिंग शुल्क भी पूरी तरह माफ कर दिया गया है। इस प्रकार अब डेबिट कार्ड से लेनदेन पर अब कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इस संबंध में सभी बैंक अलग-अलग घोषणाएं करेंगे।
नए वाहनों में कैशलेस टोल भुगतान सुविधा
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नए वाहनों में कैशलेस टोल भुगतान सुविधा
सड़क परिवहन मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से सभी नए वाहनों में डिजिटल आरएफआईडी लगाने को कहा है ताकि टोल प्लाजा और चेकपोस्ट पर कैशलेस भुगतान सुनिश्चित हो सके। राजमार्गों के टोल बूथ पर लंबी लाइनों से निजात दिलाने के लिए इलेक्ट्रानिक टोल प्रणाली की शुरुआत की गई है। अभी इस सिस्टम से जुड़ने के लिए वाहन मालिकों को रेडियो फ्रीक्वेंसी पर आधारित टैग खरीद कर लगाना पड़ता है। अब वाहन निर्माताओं को कहा गया है कि फैक्ट्री से निकलने वाले हर वाहन में पहले से ही इसे लगाया जाए।
पुराने नोट डाकघर में भी जमा होंगे
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि अब डाकघर खाते में भी 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट जमा कराए जा सकते हैं। सरकार ने मंगलवार को कहा था कि छोटी बचत योजनाओं में पुराने नोट नहीं जमा हो सकते हैं। इसी बयान को स्पष्ट करते हुए सरकार ने कहा कि डाकघर में जिनका खाता है, वे पुराने नोट जमा करा सकते हैं।
पटेल की चुप्पी के सवाल पर सरकार भी खामोश
नोटबंदी के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की ओर से कोई बयान नहीं आया है। इस बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्रालय ने टालमटोल करते हुए कहा कि यह सवाल ही बेतुका है कि सरकारी नीतियों पर कौन संवाद रहा है।
आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि इससे कोई मतलब नहीं होना चाहिए कि सरकार की तरफ से कौन बोल रहा है। मैं यहां व्यक्तिगत क्षमता से नहीं बल्कि सरकार की ओर से ही बोल रहा हूं। मैं बोलूं या कोई और, सरकारी नीतियां के बारे में जनता को अवगत कराया जा रहा है।