रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, आर्मेनिया-अजरबैजान की लड़ाई में इस्तेमाल हुई ड्रोन तकनीक अब पाकिस्तान के जरिए जम्मू तक पहुंच गई है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की जमीन पर ऐसे बहुत से ड्रोन आ चुके हैं। चूंकि चीन ऐसे ड्रोन बनाने का मास्टर है तो पाकिस्तान के लिए इनकी उपलब्धता बहुत आसान हो जाती है।
दिक्कत यह है कि ऐसे ड्रोन की मदद से सैन्य प्रतिष्ठानों और मुख्यालयों के अलावा पब्लिक सेक्टर की इकाइयों को भी निशाना बनाया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञ, कर्नल रोहित देव (रिटायर्ड) के अनुसार, यह ड्रोन पावर प्लांट, डैम और सामरिक महत्व वाले पुलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अफगानिस्तान में तालिबानी और अमेरिकी सेनाओं ने एक-दूसरे के खिलाफ ऐसे ड्रोन से जमकर हमले किए हैं।