दुनिया के 120 देशों में 17000 से ज्यादा लगे डीसेलीनेशन प्लांट से लगभग 6.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से ज्यादा साफ पानी तैयार किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस साफ पानी का दो तिहाई हिस्सा घरेलू कामों में प्रयोग किया जा रहा है, जबकि 30 फीसदी उद्योगों और 3 फीसदी सिंचाई में प्रयोग किया जा रहा है।
भारत के लिए भी स्थिति गंभीर
दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत में भी भूगर्भ जल का वितरण सभी जगह समान नहीं है। देश के पठारी भाग हमेशा से भूगर्भ जल के मामले में कमजोर रहे हैं। उत्तर भारत के मैदान हमेशा से भूगर्भ जल के मामले में संपन्न रहे हैं लेकिन सिंचाई हेतु तेजी से दोहन के कारण इनमें अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई है। भारत में भूगर्भ जल की स्थिति पर चिंता जाहिर की जा रही है। जिस तरह भारत में इसका का दोहन हो रहा है इससे भविष्य में स्थितियां खतरनाक होने का अनुमान जताया जा रहा है।
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देश का करीब 50 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में आने वाला है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 400 करोड़ लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है जिसमें 25 फीसदी भारतीय भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट में भारत को चेतावनी दी गई है कि यदि भूजल का दोहन नहीं रूका तो देश को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। 75 फीसदी घरों में पीने के साफ पानी की पहुंच ही नहीं है। केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड द्वारा तय मात्रा की तुलना में भूमिगत पानी का 70 फीसदी ज्यादा उपयोग हो रहा है।
वर्तमान समय में देश के 29 फीसदी विकास खण्ड या तो भूगर्भ जल के दयनीय स्तर पर हैं या चिंतनीय हैं और कुछ आंकड़ों के अनुसार 2030 तक लगभग 60 फीसदी ब्लाक चिंतनीय स्थिति में आ जायेंगे।भारत में 40 करोड़ लोग तटीय क्षेत्रों में रहते हैं। समुद्र के किनारे रहने के कारण इन्हें पीने के लिए शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है। अनुमान जताया जा रहा है कि इस तकनीकी के प्रयोग से इन्हें शुद्ध जल मिल सकेगा।
भारत के डिसेलीनेशन से मिलने वाले पानी की लागत को लेकर विश्व बैंक की ओर से दावा किया गया कि इसका खर्च 55 रुपए प्रति लीटर तक जा रहा है, जो मौजूदा बोतलबंद पानी के खर्च से कई गुना ज्यादा है। इसके अलावा पानी के शुद्धीकरण के दौरान बचने वाला नमक मशीन को खराब कर रहा है। इस डिसेलीनेशन मशीन की कीमत भी बहुत ज्यादा है।
आपके लिए क्यों जरूरी है जानना
वर्तमान में जल संकट किसी एक देश की समस्या न होकर वैश्विक रूप से लोगों को प्रभावित कर रही है। कुछ ही महीनों पहले दक्षिण अफ्रीका में गहराया पानी का संकट दुनियाभर में सुर्खियां बना रहा। भारत में भी बड़ी आबादी पेयजल के संकट का सामना कर रही है। गर्मियों के मौसम में इसके और गंभीर होने की संभावना जताई जा रही है। अत: इस समस्या के समाधान के लिए हो रहे प्रयासों से जनसरोकार जुड़ा हुआ है। अगर आप इस न्यूज से संबंधित कुछ और जानना चाहते हैं तो हमको बताएं, हम वो खबरें भी आपके सामने रखेंगे।
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