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डीआरडीओ को सफलता: वैमानिकी उपयोग के लिए अत्यधिक मजबूत बीटा टाइटेनियम मिश्रधातु को किया विकसित

Tue, 20 Jul 2021 11:05 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली

सार

मिश्रधातु से जो कलपुर्जे बनाए जा सकते हैं उनमें ‘स्लैट/फ्लैप ट्रैक्स, लैंडिग गियर और लैंडिग गियर में ड्रॉप लिंक’ सहित अन्य पुर्जे शामिल हैं।
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डीआरडीओ - फोटो : facebook.com/DPIDRDO
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विस्तार
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने वैमानिकी उपयोग के जटिल कलपुर्जे बनाने के लिए अत्यधिक क्षमता का बीटा टाइटेनियम मिश्रधातु स्वदेश विकसित किया है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

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मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘इस मिश्रधातु से जो कलपुर्जे बनाए जा सकते हैं उनमें ‘स्लैट/फ्लैप ट्रैक्स, लैंडिग गियर और लैंडिग गियर में ड्रॉप लिंक’ सहित अन्य पुर्जे शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि बीटा टाइटेनिम मिश्रधातु का वजन के अनुपात में अधिक मजबूत होना वैमानिक उपयोग के लिए ऐसे जटिल कलपुर्जे बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है, जो विमान के वजन को घटा सकते हैं।

मंत्रालय ने कहा कि तुलनात्मक रूप से पूरे सेवा काल में उनका लागत कम पड़ना और इस्पात की तुलना में कहीं अधिक जंगरोधी होना, उनके भारत में भी उपयोग को तर्कसंगत बनाता हे। बयान में कहा गया है कि इस मिश्र धातु में वनैडियम, लोहा और एल्युमिनियम के साथ टाइटेनियम हैं।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीटा टाइटेनियम मिश्र धातु स्वदेश में विकसित करने के लिए मंगलवार को डीआरडीओ को बधाई दी।

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