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Parliament: 'DRDO को अपने अनुसंधान का विस्तार करना चाहिए', युद्ध के खतरों पर संसदीय समिति ने जताई चिंता

Tue, 17 Dec 2024 07:17 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

समिति ने शिक्षा और उद्योगों के साथ अनुसंधान जुड़ाव के लिए डीआरडीओ में उपकरणों पर संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने डीआरडीओ से अपने अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए एआई और रोबोटिक्स जैसे प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के नए क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
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डीआरडीओ - फोटो : ANI
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्ष ने हाइब्रिड युद्ध के खतरों को उजागर किया है। इसे देखते हुए एक संसदीय पैनल ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को किसी भी युद्ध और सुरक्षा खतरों के खिलाफ युद्ध की तैयारी बढ़ाने के लिए अपने अनुसंधान एवं विकास प्रयासों का विस्तार करना चाहिए। मंगलवार को संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में समिति ने बताया कि 55 परियोजनाओं में से 23 निर्धारित समय के भीतर पूरी नहीं ह पाई।
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रिपोर्ट में बताया गया, पिछले 10 वर्षों के दौरान 34161.58 करोड़ रुपये की 571 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हुई। इस अवधि के दौरान  770.31 करोड़ रुपये की आठ परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से बंद कर दी गईं है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि डीआरडीओ को आईआईटी और आईआईएससी बेंगलुरु जैसे प्रमुख प्रौद्योगिकी संस्थानों में अपनी अनुसंधान प्रयोगशालाएं स्थापित करनी चाहिए। इससे रक्षा में रुचि रखने वाले छात्र और सैन्य प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। 

डीआरडीओ को अपने अनुसंधान को बढ़ाना चाहिए
समिति ने शिक्षा और उद्योगों के साथ अनुसंधान जुड़ाव के लिए डीआरडीओ में उपकरणों पर संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने डीआरडीओ से अपने अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए एआई और रोबोटिक्स जैसे प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के नए क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। इसके अलावा समिति का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में जारी संघर्ष ने काफी हद तक हाइब्रिड युद्ध के खतरों को उजागर किया है। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। 
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समिति ने कहा कि डीआरडीओ को शिक्षा और उद्योग के सहयोग से अपने अनुसंधान और विकास प्रयासों को और व्यापक बनाना चाहिए। इसमें हाइब्रिड काइनेटिक और नॉन काइनेटिक युद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ ड्रोन रोधी क्षमताओं को शामिल करना चाहिए। 

समिति का मानना है कि डीआरडीओ, जो कि देश का सबसे उन्नत अनुसंधान संस्थान है, को दूर-दराज के क्षेत्रों में सौर और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में दाखिल होना चाहिए ताकि सीमाई क्षेत्रों में तैनात सशस्त्र बल के जवानों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। समिति को इस बारे में उठाए गए कदमों की जानकारी चाहिए होगी।
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