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सियाचीन-लद्दाख में तैनात जवानों को ठंड से बचाएगा हिम तापक, डीआरडीओ ने बनाई खास डिवाइस

Sun, 10 Jan 2021 04:33 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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DRDO - फोटो : ट्विटर
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देश के पूर्वी लद्दाख, सियाचीन और कश्मीर जैसे बर्फीले व ऊंचाई वाले इलाकों में सीमा पर ठंड से जूझने वाले भारतीय सेना के जवानों को डीआरडीओ ने खास तोहफा दिया है। दरअसल, डीआरडीओ ने ‘हिम तापक‘ नाम की एक खास डिवाइस बनाई है, जो जवानों को सुरक्षित रखेगी। बता दें कि हिम तापक एक स्पेस हीटिंग डिवाइस है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि जवानों की मौत बैकब्लाॅस्ट और कार्बन मोनो ऑक्साइड के जहर के कारण न हो।

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सेना ने दिया 420 करोड़ रुपये का ऑर्डर
डिफेंस इंस्टीट्यूट आफ फिजियोलाॅजी एंड अलाॅइड साइंसेस के डायरेक्टर डाॅ. राजीव वार्ष्णेय ने बताया कि भारतीय सेना ने इस डिवाइस के मैन्यूफेक्चरर्स  को 420 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया है। इन्हें सेना व आईटीबीपी के उन सभी नए आवासों में लगाया जाएगा, जहां तापमान बहुत कम रहता है। 

DRDO developed 'Him Tapak' new space heating devices for the Indian Army deployed in Eastern Ladakh,Siachen & high altitude areas. It will ensure that there are no deaths of jawans due to backblast&carbon monoxide poisoning:Director,Defence Institute of Physiology&Allied Sciences pic.twitter.com/lcNkhdHuzh

शीतदंश व बिवाई से बचाएगा ‘एलोकल क्रीम‘
डॉ. वार्ष्णेय ने बताया, हमने बुखारी नामक उपकरण विकसित किया है, इसमें तीन सुधार किए गए हैं। पहला, इसमें तेल की खपत आधी है और हमारी गणना के अनुसार हर साल 3650 करोड़ रुपये की बचत होगी। दूसरा, ऊंचे इलाकों में हवा की गति बहुत तेज होती है। इस गति में बैकब्लास्ट होता है। नए डिजाइन में कोई बैकब्लास्ट नहीं होगा।  तीसरा, उपकरण की क्षमता छह लीटर की है और दहन 100 फीसदी। लिहाजा इसके कार्बन मोनोऑक्साइड व अन्य जहरीली गैस उत्पादन करने के कोई संभावना नहीं है। जल्द ही इसे को सेना व आईटीबीपी के सभी बेस पर लगाया जाएगा, जहां तापमान काफी कम होता है। 

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सोलर स्नो मेल्टर भी बनाया गया
डीआरडीओ के वैज्ञानिक सतीश चौहान ने बताया, पूर्वी लद्दाख व इसी तरह के इलाकों में पीने के पानी की समस्या दूर करने के लिए बर्फ पिघलाने वाला उपकरण विकसित किया गया है। यह सौर ऊर्जा पर काम करता है और हर घंटे पांच से सात लीटर पानी उपलब्ध करा सकता है। ट्रायल के लिए इसे सियाचिन, खारडूंगला और तवांग में लगाया गया है। यह काफी किफायती भी है।

 

ठंड में होने वाले जख्मों से बचाएगी एलोकल क्रीम 
डॉ. वार्ष्णेय ने बताया, डीआरडीओ द्वारा विकसित एलोकल क्रीम अत्यधिक ठंडी जगहों पर तैनात जवानों को फ्रोस्टबाइट, चिलब्लेन व ठंड से होने वाले अन्य जख्मों से बचाएगी। सेना ने पूर्वी लद्दाख, सियाचिन और अन्य इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए क्रीम के 3 से 3.5 लाख जार का ऑर्डर दिया है। हाल ही में हमें उत्तरी कमांड से दो करोड़ के जार का ऑर्डर मिला है। 

लचीली बोतल में नहीं जमेगा पानी 
डीआरडीओ ने लचीली बोतल भी विकसित की है, जो माइनस 50 से 100 डिग्री तापमान का सामना कर सकती है जिससे बोतल के अंदर का पानी नहीं जमेगा। वार्ष्णेय के मुताबिक, बोतल में वाटर फिल्टर लगाया गया है। इस फिल्टर की मदद से बोतल के भीतर पानी नहीं जम सकता है। आप इस फिल्टर को हटाकर सामान्य बोतल की तरह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें सीआरपीएफ से 400 बोतल का ऑर्डर मिला है। 

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