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डीआरडीओ के स्वदेशी पैराशूट ने रचा इतिहास: जहां सांस लेना भी चुनौती, वहां सफल रहा स्वदेशी एमसीपीएस का परीक्षण

Wed, 26 Aug 2026 02:44 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

डीआरडीओ की एडीआरडीई द्वारा विकसित एमसीपीएस का न्योमा के मुध ड्रॉप जोन में 22,000 फीट की ऊंचाई से सफल परीक्षण किया गया। माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तापमान में परीक्षण जम्परों ने स्वदेशी पैराशूट प्रणाली और उससे जुड़े उपकरणों के साथ छलांग लगाई। 20,000 फीट पर पैराशूट खुला और 13,700 फीट पर सुरक्षित लैंडिंग हुई। 
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अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत ने अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में सैनिकों की पैराशूट क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ की आगरा स्थित एडीआरडीई द्वारा डिजाइन और विकसित मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (एमसीपीएस) का दुनिया के सबसे ऊंचे ड्रॉप जोन में शामिल न्योमा के मुध ड्रॉप जोन में सफल परीक्षण किया गया।

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22,000 फीट की ऊंचाई से लगाई छलांग
इस परीक्षण के दौरान एडीआरडीई के प्रशिक्षित परीक्षण जम्परों ने करीब 22,000 फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई। यही नहीं, इस ऊंचाई पर तापमान करीब माइनस 15 डिग्री सेल्सियस था। इतनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पैराशूट प्रणाली और उससे जुड़े सभी स्वदेशी उप-तंत्रों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया।

चार परीक्षण जम्परों ने लिया हिस्सा
परीक्षण के दौरान एडीआरडीई के मुख्य परीक्षण जम्पर विंग कमांडर राहुल झा, एमडब्ल्यूओ आर. जे. सिंह, वीएम (जी) और एमडब्ल्यूओ विवेक तिवारी ने 22,000 फीट की ऊंचाई से यह छलांग लगाई।
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20,000 फीट पर खुला पैराशूट
डीआरडीओ के अनुसार, छलांग के दौरान एमसीपीएस को 20,000 फीट की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक खोला गया। इसके बाद परीक्षण जम्परों ने नियंत्रित तरीके से नीचे उतरते हुए 13,700 फीट की ऊंचाई पर सुरक्षित लैंडिंग की।

पैराशूट के साथ स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल
इस परीक्षण की खास बात यह रही कि यहां केवल पैराशूट ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया। इनमें स्वदेशी पैरा कंप्यूटर, ऑक्सीजन प्रणाली और विशेष जंपसूट भी शामिल थे। यह पूरा तंत्र अत्यधिक ऊंचाई पर भी भरोसेमंद साबित हुआ है।

कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी साबित हुआ एमसीपीएस
परीक्षण ने यह साबित किया कि एमसीपीएस बेहद कम तापमान और अत्यधिक ऊंचाई जैसी कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। परीक्षण के सफल परिणाम से इसकी विश्वसनीयता, प्रभावशीलता और सामरिक उपयोगिता की पुष्टि हुई है।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में त्वरित तैनाती में मिलेगी मदद
गौरतलब है कि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के दौरान सैनिकों और आवश्यक संसाधनों की तेजी से तैनाती बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह स्वदेशी सैन्य कॉम्बैट पैराशूट प्रणाली महत्वपूर्ण है। यह भारतीय सशस्त्र बलों की विशेष अभियानों और ऊंचाई वाले इलाकों में त्वरित तैनाती की क्षमता को मजबूत कर सकती है।

आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक को मिली मजबूती
एमसीपीएस का यह सफल परीक्षण भारत की महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और अहम उपलब्धि माना जा रहा है। परीक्षण ने न केवल स्वदेशी पैराशूट तकनीक की क्षमता को प्रदर्शित किया, बल्कि अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में इसके सामरिक इस्तेमाल की संभावनाओं को भी मजबूत किया है।

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माइनस 15 डिग्री में सफल रहा परीक्षण
22,000 फीट की ऊंचाई, माइनस 15 डिग्री तापमान और 20,000 फीट पर पैराशूट का सफल खुलना, यह परीक्षण दरअसल भारतीय रक्षा अनुसंधान की क्षमता को दिखाता है। यह वह अनुसंधान है जिसमें अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी स्वदेशी तकनीक को युद्धक उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है।

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