द्रौपदी मुर्मू के घर जश्न का माहौल
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दीदी नॉनवेज तो बहुत दूर प्याज लहसुन तक नहीं खाती
द्रौपदी मुर्मू के भाई तारिणीसेन टुडू कहते हैं कि दीदी को जिस तरीके का भोजन पसंद है उसी तरीके की दिव्य दावत का इंतजाम उनके गांव अपरबेड़ा और उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत वाले कस्बे रायरंगपुर में चल रहा है। वह कहते हैं कि द्रौपदी मुर्मू को खाने में सादा और वैजिटेरियन भोजन ही पसंद है। यहां तक कि द्रौपदी मुर्मू अपने खाने में प्याज और लहसुन का भी इस्तेमाल नहीं करती हैं। वह कहते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में पलने बढ़ने वाले पूरे परिवार का उनकी दीदी द्रौपदी मुर्मू बहुत ख्याल रखती हैं। तारिणीसेन कहते हैं परिवार में सबसे बड़ी अब उनकी दीदी द्रौपदी हैं। वह कहते हैं कि उनके एक बड़े भाई भी थे। लेकिन उनकी मृत्यु हो गई। उनके परिवार की पूरी जिम्मेदारी दीदी पर ही है। हालांकि उनका कहना है कि जब से वह राजनीतिक जीवन में आई हैं तब से वह अपने क्षेत्र और इलाके की जनता के साथ परिवार की तरह ही पेश आती हैं। और राष्ट्रपति बनने के बाद उनका शुरुआत से चला आ रहा अपनेपन का व्यवहार और प्यार निश्चित तौर पर देश की जनता को मिलेगा।
वे बताते हैं कि दीदी ने बचपन से ही अपने पूरे परिवार को एक डोर में बांधकर रखा है। मां और पिताजी की मौत के बाद से द्रौपदी दीदी ने पूरे परिवार को मां और पिता जी का प्यार दिया। यही वजह है कि उनके बड़े भाई की मृत्यु के बाद भाभी और उनके दो बच्चों समेत पूरे परिवार को दीदी एक डोर में सबको पिरोकर चलती हैं। वे कहते हैं हालांकि दीदी का जीवन बहुत ही व्यस्तताओं भरा है। बावजूद इसके वह अपने परिवार और जनता के बीच सामंजस्य स्थापित कर सबको साथ लेकर चलती हैं।
राष्ट्रपति भवन देखने की ख्वाहिश
द्रोपदी मुर्मू के भाई कहते हैं कि वैसे तो उनका पूरा परिवार गांव में ही रहता है और वहीं खेती-बाड़ी का काम देखता है। तारिणीसेन कहते हैं कि वह एक बार संसद भवन और लालकिला देख चुके हैं, लेकिन अब उनकी ख्वाहिश राष्ट्रपति भवन देखने की है। उनका कहना है सिर्फ उनकी ही नहीं बल्कि गांव और रायरंगपुर जैसे टाउन में उनसे जुड़े हुए सैकड़ों हजारों लोगों की यही ख्वाहिश है कि दीदी जल्द राष्ट्रपति बनें और सभी लोग राष्ट्रपति भवन देखने जाएं। वे कहते हैं कि उन्होंने सुना है कि राष्ट्रपति भवन बहुत बड़ा है लेकिन आज तक कभी उन्होंने देखा नहीं है। दीदी के राष्ट्रपति बनने के बाद गांव और कस्बे के लोग राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने और उसे देखने की गुजारिश जरूर करेंगे। उनका कहना है कि पूरा गांव और रायरंगपुर कस्बे से जुड़े हुए लोग उन्हें दीदी कह कर बुलाते हैं। उड़ीसा और आदिवासी बाहुल्य इलाके में द्रोपदी मुर्मू दीदी के नाम से मशहूर हैं।
द्रौपदी मुर्मू की भाभी शत्रोमणि टूडू अमरउजाला डॉट कॉम से बातचीत में कहती हैं कि दीदी के राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी बनेने की खबर उन्हें अखबारों के माध्यम से ही पता चली थी। जैसे ही पता चला कि वह प्रत्याशी बनी हैं उसी समय लोगों ने उनके घर आकर बधाइयां देनी शुरू कर दी थीं। जब द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति बन जाएंगी तो, उनसे क्या उम्मीदें आप लगाएंगी, इस सवाल पर उनकी भाभी कहती हैं कि दीदी को सब पता है। उनसे कोई भी ऐसी चीज छुपी नहीं है, जो उनके संज्ञान में न हो। शत्रोमणि टुडू कहती हैं कि वह तो बस वक्त का इंतजार कर रही हैं कि जैसे ही वह दीदी से मिलेंगी तो उन्हें अपने हाथ का बना हुआ शाकाहारी भोजन परोसेंगी।