एक विधेयक का ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसके तहत जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक एकीकृत प्राधिकरण बनाने की बात कही गई है। यह संस्थान गांव से लेकर शहर तक जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करेगा। इसके अलावा जमीन के नीचे पानी के प्रबंधन और बाढ़ से प्रभावित होने वाले मैदानी इलाकों के प्रबंधन पर भी ध्यान देगा। यह ड्राफ्ट राज्यों को भेजे गए हैं।
जल सुरक्षा हासिल करने के लिए तैयार किया ड्राफ्ट
जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त सचिव राकेश कुमार वर्मा ने कहा कि विकसित भारत के विजन के तहत जल सुरक्षा हासिल करने के लिए सरकार ने राज्य स्तर पर एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन प्राधिकरण (आईडब्ल्यूआरएम) का प्रस्ताव रखा है। यह जल से संबंधित कई विभागों और एजेंसियों के प्रयासों का समन्वय और एकीकरण करेगा।
सभी राज्यों को भेजा गया
उन्होंने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और त्रिवेणी जल संस्थान द्वारा आयोजित 10वें जल नवाचार शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहा, 'सभी राज्यों को एक मसौदा भेजा गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली आईडब्ल्यूआरएम परिषद की देखरेख में इस राज्य आईडब्ल्यूआरएम प्राधिकरण को जल क्षेत्र के विकास की दिशा निर्धारित करने के लिए विभिन्न नियामक शक्तियां दी गई हैं।'
उन्होंने कहा, 'यह गांवों और शहरों से लेकर जिलों तथा राज्य स्तर तक जल सुरक्षा योजनाओं, भूजल प्रबंधन, बाढ़ के मैदान प्रबंधन और नदी संरक्षण क्षेत्रों को विकसित करने के लिए जिम्मेदार होगा।'
जल शक्ति मंत्रालय के पास राष्ट्रीय रणनीति
अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय जल डेटा नीति का नया ड्राफ्ट इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। जल शक्ति मंत्रालय के पास जल क्षेत्र में नवाचार को गति देने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति भी है। उन्होंने कहा, 'इसका उद्देश्य जल क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के लिए खुले सहयोग के अवसर और सक्षम मंच बनाना है।'
वर्मा ने यह भी कहा कि पानी के औद्योगिक उपयोग में बेहतर दक्षता हासिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश के औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 40 अरब क्यूबिक मीटर पानी का उपयोग किया जाता है। भारतीय उद्योगों में जल उपयोग दक्षता विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए काफी गुंजाइश उपलब्ध है।'