यह एक ज्ञात तथ्य है कि कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान भी मेडिकल स्टाफ दबाव के कारण काम कर रहे हैं। वे लंबे समय तक काम कर रहे हैं और जैसा कि वे रोगियों का इलाज करते हैं, वे संक्रमित होने और अपने परिवारों को जोखिम में डालने के डर को एक तरफ नहीं रख सकते हैं। लेकिन यह कहानी का सिर्फ एक पक्ष है जबकि दूसरा पक्ष यह है कि कोविड-19 को पकड़ने के डर से खतरनाक बीमारी से ग्रसित मरीज भी डॉक्टरों के पास जाने से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं कोविड-19 की वजह से डर के साथ लोग नए साल को पार्टी करने के समय के रूप में देख रहे हैं और 2020 में हुए कोरोना के प्रहार को पीछे छोड़ दिया है। लेकिन इससे जीवन और यहां तक कि स्वास्थ्य सेवा तक संपार्श्विक क्षति हो सकती है।
हेल्थकेयर से जुड़े लोगों पर महामारी के प्रभाव के बारे में बात करते हुए, डॉ. श्रीराम नेने ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 'जब पहली बार मार्च में महामारी आई थी, तो सब कुछ बंद हो गया था। अधिकांश वैकल्पिक मामलों और लोगों के डॉक्टरों के पास जाने के मामले में नाटकीय गिरावट आई। कई उच्च जोखिम वाले रोगी थे जो ऑपरेट नहीं किए जा सकते थे। पीपीई किट पर खर्च बढ़ रहा था, जो कई स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए मुश्किल हो गया था। ओपीडी बंद हो गई, कई बीमारियों की उपेक्षा की गई और यह बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। केवल उन रोगियों को जिन्हें तत्काल और आकस्मिक देखभाल की आवश्यकता थी, उन्होंने अस्पतालों को सूचना दी, दूसरों ने अस्पताल पहुंचने में देरी की। हृदय रोगों से पीड़ित लोग सबसे अधिक प्रभावित थे क्योंकि उन्होंने कोरोना के डर से डॉक्टर को रिपोर्ट नहीं किया था।'
कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. श्रीराम नेने, जो अपने उत्कृष्ट काम के लिए लोकप्रिय हैं और अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के पति के रूप में भी लोगों के बीच चर्चित हैं। श्रीराम नेने को माइट्रल वाल्व की मरम्मत में सर्जन के रूप में 18 वर्ष का अनुभव है। वह खुले और एंडोवस्कुलर महाधमनी सर्जरी, थोरेसिक ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक के साथ-साथ दिल और फेफड़ों की सर्जरी के लिए जाने जाते हैं।
डॉ. नेने कहते हैं, 'एक सर्जन होने के नाते मैं यह बताने की कोशिश कर रहा हूं कि अमेरिका के अस्पतालों में मरीजों के पहुंचने की संख्या में नाटकीय रूप से लगभग 30 फीसदी की गिरावट आई है। लोग केवल आपातकालीन और अतिआवश्यकता होने पर ही अस्पताल जा रहे हैं। डॉक्टर लंबे समय तक काम कर रहे हैं। इस दौरान टेलीमेडिसिन ने उड़ान भरी, लेकिन हमें पता चला कि ऐसी स्थितियां हैं, जिनकी जांच किए बिना आकलन करना कठिन है, यह फॉलोअप और ट्राइएज के लिए एक बड़ा माध्यम है (यह पता लगाने के लिए कि क्या उन्हें व्यक्तिगत रूप से अस्पताल जाने की आवश्यकता है) और हम डॉक्टरों को सही निदान और उपचार करना है, जो एक चुनौती हो सकती है। रूटीन चेक अप में जबरदस्त गिरावट आई है क्योंकि लोग अपनी जांच कराना बंद कर रहे हैं और डॉक्टरों का जीवन पीपीई प्रोटोकॉल से और जटिल हो गया है।'
'तस्वीर का दूसरा हिस्सा फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्कर्स का था। जिनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। डॉक्टरों, नर्सों, प्रशिक्षुओं, चिकित्सकों, रेजिडेंट्स को अपने और परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम के बीच काम करना पड़ रहा था। कोविड-19 का इलाज करना कोई जादू की गोली नहीं थी, इसलिए हमने विभिन्न तकनीकों, मान्यता प्राप्त लक्षणों को जानने की कोशिश की और उनका इलाज किया। डॉक्टरों ने हम सभी के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी।'