महाराष्ट्र सरकार और उसके विशेषज्ञों में दो-तीन सप्ताह में कोरोना की तीसरी लहर आने का खतरा दिखाई दे रहा है, लेकिन नेशनल कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. एनके अरोड़ा ऐसी तस्वीर अभी नहीं देख पा रहे हैं। डॉ. अरोड़ा ने अमर उजाला से विशेष बात की। उन्होंने कहा कि अभी तीसरी लहर कब, किस रूप में और कितनी घातकता के साथ आएगी, कहना मुश्किल है। थोड़ा समय लगेगा। इस बारे में महाराष्ट्र के दावे में विश्वास करना थोड़ा मुश्किल है।
लोगबाग आम जीवन में लौटने के लिए लगवाएं टीका
डा. अरोड़ा ने कहा कि देश का टीका अभियान जुलाई और अगस्त महीने से अपने पूरे प्रवाह में आ जाएगा। लोगों को चाहिए कि आम जीवन में लौटने के लिए टीका जरूर लगवाएं। इससे लोगों में कोरोना का संक्रमण होने पर उनके गंभीर रूप से अस्वस्थ होने या जान जाने का खतरा नहीं रहेगा। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि जुलाई महीने में कोविशील्ड से 8-9 करोड़, कोवाक्सिन से 5-6 करोड़, स्पूतनिक से 2-3 करोड़ टीका का डोज मिलेंगे। इस तरह से हर दिन करीब 50 लाख लोगों को देश के 70 हजार टीका केंद्रों पर टीका लगाया जा सकेगा। अगस्त महीने से हम हर दिन करीब एक करोड़ लोगों को टीका की खुराक दे सकेंगे। इस तरह से देश के नागरिकों को 200 करोड़ टीका की खुराक देने का प्लान तैयार किया जा रहा है।
जब तक दवाई नहीं तब तक अपनाएं कोरोना व्यवहार
कोविड टास्क फोर्स के सदस्य का कहना है कि टीकाकरण से कोरोना नियंत्रण में आएगा, लेकिन इससे कोरोना खत्म नहीं होगा। इसका वायरस नए रूपों में आ रहा है और हमारे साथ बना रहेगा। इसलिए टीका लगवाने के बाद भी लोगों को दो गज दूरी, मास्क जरूरी जैसे कोरोना व्यवहार के नियम का पालन करना होगा। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि अभी कोरोना की दवा आने में समय लग सकता है। दुनिया के तमाम देशों के चिकित्सा वैज्ञानिक कोरोना के दवा की खोज में लगे हैं। भारत में भी कई स्तरों पर इसकी खोज चल रही है, लेकिन अभी हम यह नहीं कह सकते कि यह दवा कब विकसित हो सकेगी। परीक्षण के बाद इसे आमजनों के लिए जारी होने में समय लग सकता है।
अमेरिका और इस्राइल से मत करिए भारत की तुलना, मास्क लगाइए
अमेरिका और इस्राइल में लोग कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क नहीं लगाते और टीका पर भरोसा करते हैं? इस सवाल के जवाब में डॉ. अरोड़ा का कहना है कि अमेरिका की साइज आबादी देखिए। केवल 35 करोड़ लोग। एक मकान में दो-तीन लोग। उनकी सामाजिक से लेकर व्यवसायिक स्थितियां तक अलग-अलग हैं। भारत के लोगों को टीका की सक्षमता को लेकर अमेरिका से तुलना नहीं करनी चाहिए। हमारे यहां अमेरिका और इस्राइल से बहुत घनी आबादी है। जीवन के कई स्तर हैं और बाजारों से लेकर गांव, कस्बों तक भीड़भाड़ की अलग-अलग स्थितियां है। इसलिए यह तुलना सही नहीं है। हमारी देश के लोगों से अपील है कि किसी के बहकावे, भ्रामक जानकारी, डर से बाहर निकलें और टीका लगवाएं।