डॉ. सिंह पांच बार राज्यसभा के लिए चुने गए। उनसे अधिक छह बार चुनकर आने वाली सांसद नजमा हेपतुल्लाह हैं लेकिन वे रिटायर हो चुकी हैं और मणिपुर की राज्यपाल हैं। डॉ. सिंह के अलावा आज तक केवल सात ही अन्य राजनेता हैं जिन्हें राज्यसभा में पांच कार्यकाल मिले लेकिन वे सभी रिटायर हो चुके हैं। डॉ. मनमोहन सिंह का राज्यसभा से रिश्ता 1991 में पहली बार जुड़ा।
डॉ. सिंह असम से राज्यसभा के लिए चुनकर आते थे और उनका स्थाई पता भी गुवाहाटी कामरूप जिले का है। वे राज्यसभा सांसद के तौर पर 1995, 2001, 2007 और 2013 में लगातार चुनकर आते रहे। उन्होंने राज्यसभा में 1998 और 2004 में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभाई। वर्तमान सदन में ऐसा कोई सदस्य नहीं है जो लगातार पांचवीं बार राज्यसभा के लिए चुनकर आया हो। कांग्रेस भी अब अपने वरिष्ठ नेता की फिलहाल राज्यसभा में तत्काल वापसी नहीं करा सकती है।
राज्यसभा के पांच अन्य सदस्य 24 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। संसद का बजट सत्र 26 जुलाई तक चलना है ऐसे में इन सदस्यों की सदन में औपचारिक विदाई और पार्टी भी होगी। एआईडीएमके सांसद केआर अर्जुनन, डॉ. लक्ष्मणन, डॉ. वी मैत्रियन, टी रथीनवल के अलावा सीपीआई के डी राजा अगले महीने रिटायर होंगे। ये सभी सांसद तमिलनाडु से चुनकर आए थे। राज्यसभा में कुछ सदस्यों के साथ ऐसा भी हुआ है कि उन्हें सत्र समाप्त होने के कुछ दिन बाद रिटायर होना था लिहाजा उन्हें सदन में पहले ही विदाई दी गई है।
राज्यसभा में शिवसेना के नेता संजय राउत का कहना है कि डॉ. मनमोहन सिंह दलगत राजनीति से ऊपर हैं। वे देश के दस साल तक प्रधानमंत्री रहे और देश को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से दिशा दी है। वे उच्च सदन के सदस्य रहे हैं उन्हें विधिवत विदाई दी जानी चाहिए। इसके लिए सरकार को संसद के सेंट्रल हॉल में विशेष समारोह आयोजित करना चाहिए। जिसमें उन्हें बतौर वरिष्ठ सदस्य विदाई देनी चाहिए।
विदाई दी जानी चाहिए लेकिन नियम ऐसे ही : डी राजा
सीपीआई सांसद डी.राजा का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री के नाते उन्हें विदाई दी जानी चाहिए लेकिन संसद सत्र बाद में शुरू हो रहा है। पूरा सदन डा. मनमोहन सिंह को याद करेगा। सदन के नियम ऐसे हैं इसमें कुछ नहीं किया जा सकता है। जब सत्र चल रहा होता है और सदस्य रिटायर होते हैं तो उन्हें अपनी बात कहने का समय मिलता है। पिछली बार भी कई सदस्य रिटायर हुए उस दौरान संसद का सत्र नहीं चल रहा है।