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SDG: सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने पर अरुणाभा घोष बोले, सतत भविष्य के लिए हरित विकास समझौता सबसे अहम

Sun, 10 Sep 2023 05:38 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा कि इस साल हमने उत्तरी अमेरिका से लेकर यूरोप व एशिया तक जलवायु से जुड़ी कई आपदाएं देखीं। यह समझौता ऐसी आपदाओं से लोगों को बचाने और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने की 2030 तक की कार्ययोजना का केंद्र बिंदु हैं।
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Green development - फोटो : iStock
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विस्तार
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भारत की अध्यक्षता में जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाना ऐतिहासिक है। इसका सबसे महत्वपूर्ण घटक सतत भविष्य के लिए हरित विकास समझौता है। इस साल हमने उत्तरी अमेरिका से लेकर यूरोप व एशिया तक जलवायु से जुड़ी कई आपदाएं देखीं। यह समझौता ऐसी आपदाओं से लोगों को बचाने और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने की 2030 तक की कार्ययोजना का केंद्र बिंदु हैं। ये बातें पॉलिसी रिसर्च थिंक टैंक काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के सीईओ डॉ. अरुणाभा घोष ने कहीं।

हरित विकास समझौते के पांच मुख्य घटक

  1. पहला संसाधन कुशलता व सतत उपभोग के महत्व पर ध्यान केंद्रित करना है। 
  2. दूसरा स्वच्छ, सतत, न्यायसंगत, किफायती व समावेशी ऊर्जा परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करना है। इसके तहत बड़े बुनियादी ढांचों को विकसित किया जाएगा, जिन्हें स्वच्छ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे से संचालित करने की जरूरत है। ऐसे में वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन की घोषणा ग्रीन हाइड्रोजन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र व हरित हाइड्रोजन नवाचार केंद्र का निर्माण और पूरी दुनिया में 2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता को तिगुना करना महत्वपूर्ण कदम है।
  3. तीसरा महत्वपूर्ण घटक जलवायु व सतत वित्त पर ध्यान केंद्रित करना है। स्वच्छ ऊर्जा निवेश व एसडीजी पर समग्रता से ध्यान केंद्रित करने के लिए खरबों डॉलर की इस आवश्यकता को रेखांकित करना ही एसडीजी के व्यापक एजेंडे में स्वच्छ ऊर्जा व जलवायु गतिविधियों के घटकों को सम्मिलित करता है। 
  4. चौथा घटक महासागर आधारित ब्लू इकोनमी है। यह न सिर्फ महासागरों की भूमिका को स्वीकार करने, बल्कि उनके सतत उपयोग की समझ पैदा करने के लिए भी जरूरी है।
  5. पांचवां घटक आपदा का सामना करने में सक्षम बुनियादी ढांचे का निर्माण है। भारत पहले आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन को प्रोत्साहित कर चुका है। अब हमारे पास आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह भी है, जिसे भारत ने जी-20 में पेश किया है। इस प्रकार इन सभी अलग-अलग घटकों को एक साथ लाना हरित विकास समझौता है।
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