गुजरात विधानसभा चुनाव-2017 राजनीति में नई पटकथा लिखने जा रहा है। यह पहला ऐसा राज्य विधानसभा का चुनाव है, जहां कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपनी विचारधारा और सभ्यता की लड़ाई से जोड़ लिया है। दोनों ही पार्टियां चुनाव प्रचार में न केवल पूरा जोर लगा रही हैं, बल्कि भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस को भी अभी केवल गुजरात चाहिए।
इस हवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी ताकत से कूद पड़ा है। इलाहाबाद और बनारस के संघ से जुड़े कार्यकर्ता गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, वड़ोदरा में प्रचार के लिए उतर पड़े हैं।
इंदौर, भोपाल, जयपुर के संघ से जुड़े साथियों के साथ भाजपा के प्रचार अभियान में सहयोग दे रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार संघ के एक दर्जन से अधिक अनुषांगिक संगठनों ने कमान संभाल ली है। इन संगठनों में आपसे के तालमेल पर भी पूरा ध्यान दिया गया है।
सूत्र बताते हैं कि इसके लिए भी एक समिति बनाई गई है। ताकि आपसी विरोधाभास की स्थिति न पैदा होने पाए। इस तरह से आरएसएस भी भाजपा के साथ खड़ा है। संघ जमीनी स्तर पर दरवाजे-दरवाजे पर जाकर लोगों को जागरुक कर रहा है। इसमें हिन्दुत्व, स्वाभिमान, अपना गुजरात की थीम शामिल है।
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लखनऊ से गए एक वरिष्ठ सदस्य के मुताबिक वह लोगों को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा के 22 साल के शासन में राज्य के कारोबारियों, व्यापारियों, गुजरातियों को क्या मिला? समझा जा रहा है कि इस दौरान वह भाजपा की सरकार न बन पाने की स्थिति में संभावित भय से भी अवगत करा रहे होंगे। कुल मिलाकर बात हिन्दुत्व के एजेंडे की है।