डॉ. वीके पॉल ने कहा कि मॉडर्ना को दो सप्ताह पहले आपात इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। अभी यह प्रक्रिया में है। अमेरिकी सरकार से बातचीत चल रही है।अमेरिका ने भारत को मॉडर्ना की करीब 70 लाख खुराक दान में देने का फैसला लिया है।
देश में कभी भी मॉडर्ना वैक्सीन की खुराक आ सकती है। सरकार ने अमेरिका को एक पत्र लिखा है जिसका जवाब आना अभी बाकी है। अगर इस पत्र में मौजूद कानूनी नियमों को लेकर आपसी सहमति बनती है तो उसके सप्ताह भर में मॉडर्ना वैक्सीन की पहली खेप भारत आ सकती है।
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शुक्रवार को टीकाकरण एम्पॉवर्ड ग्रुप के चेयरमेन डॉ. वीके पॉल ने कहा कि मॉडर्ना को दो सप्ताह पहले आपात इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। अभी यह प्रक्रिया में है। अमेरिकी सरकार से बातचीत चल रही है। कुछ कानूनी नियमों को पूरा करने के लिए पत्र व्यवहार किया गया है। फिलहाल स्थिति यह मान सकते हैं कि भारत में कभी भी मॉडर्ना वैक्सीन की पहली खेप आ सकती है।
दरअसल अमेरिका ने भारत को मॉडर्ना की करीब 70 लाख खुराक दान में देने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार को जब इसकी जानकारी मिली तो कंपनी से आवदेन करवाया गया। इसके तुरंत बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने मॉडर्ना वैक्सीन को आपात कालीन इस्तेमाल की अनुमति भी प्रदान कर दी।
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इसी के साथ ही मॉडर्ना देश की चौथी कोविड वैक्सीन भी बन गई लेकिन अनुमति देने के बाद भी अब तक इस वैक्सीन की एक भी खेप भारत को नहीं मिली है।
इससे पहले अमेरिकी सरकार ने बयान जारी करते हुए कहा था कि भारत सरकार की ओर से देरी की जा रही है। उनके यहां वैक्सीन की खेप तैयार है। अगर भारत से जल्द ही उन्हें जवाब मिलता है तो खेप जारी कर दी जाएगी।