भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दोनों कब्रों पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाकर गंदगी और दाग मिटाए। ताजमहल के तामीर होने के 368 साल बाद यह पहला मौका था जब एएसआई ने कब्रों पर मुल्तानी मिट्टी लगाकर मडपैक ट्रीटमेंट से सफाई की।
एएसआई अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डॉ. एमके भटनागर ने इस काम को अंजाम देने की शुरूआत कराई थी। इन कब्रों के ऊपर लगे फानूस को भी उतारकर केमिकल ट्रीटमेंट कर चमकाया गया। यह फानूस लार्ड कर्जन ने 1908 में भेंट किए थे। मिस्र के काइरो में बनी मस्जिद में देखकर लैंप को डिजाइन कराकर भेंट किया गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के लिए रॉयल गेट के रेड सैंड स्टोन प्लेटफार्म और रॉयल गेट के अंदर के पत्थरों की भी सफाई की गई थी। रॉयल गेट से लेकर संगमरमरी गुंबद तक फव्वारों के दोनों ओर के पाथवे के पत्थरों का केमिकल ट्रीटमेंट किया गया।
गुंबद के अंदर कब्रों के बाहर लगी संगमरमरी जाली और उत्तर दिशा में यमुना किनारे की संगमरमरी दीवार को भी साफ किया गया। इसी दीवार पर कीड़ों के हरे दाग लगते रहे हैं।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप वास्तविक कब्रों का दौरा नहीं कर सकते थे, क्योंकि प्रवेश द्वार पांच फीट ऊंचा है। वहीं राष्ट्रपति की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली टीम ने प्रोटोकॉल के अनुसार सूचित किया था कि राष्ट्रपति किसी भी परिस्थिति में झुकेंगे नहीं, चाहे फिर भले ही यह 17वीं शताब्दी की बनी कब्रें देखने के लिए ही क्यों ना हो।