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भारत में ट्रंप: ..तो क्या राष्ट्रपति ने बिना झुके किया ताज का दीदार, 368 साल बाद देखा ऐसा नजारा

Mon, 24 Feb 2020 11:14 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आगरा में ताज महल का दीदार करने पहुंचे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप। - फोटो : PTI
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार को भारत की अपनी पहली दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के भव्य स्वागत की तैयारी की गई थी। अहमदाबाद की सड़कों पर बड़े-बड़े होर्डिंग और साइन बोर्ड लगाए गए थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी सुरक्षा के बीच अपनी यात्रा के अगले पड़ाव के तौर पर आगरा पहुंचकर पत्नी मेलानिया ट्रंप, बेटी और दामाद के साथ ताजमहल का दीदार भी किया।

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स्थानीय प्रशासन ने राष्ट्रपति ट्रंप की अगवानी के लिए पूरी तैयारी की थी। ताकि राष्ट्रपति के समक्ष शहर की खूबसूरती को प्रदर्शित किया जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए ताज महल के मकबरों की सफाई की गई। पानी की बौछार से इसके गुंबद को धोया गया। सबसे खास बात यह रही कि यह सब ताज महल के बनकर तैयार होने के करीब 368 साल बाद किया गया।

दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल के दीदार के लिए आगरा आए अमेरिकी राष्ट्रपति को ताजमहल में कोई भी दाग नजर नहीं आए इसकी पूरी तैयारी की गई थी। संगमरमरी अजूबे में मुगल शहंशाह शाहजहां और मुमताज महल की कब्रों की पहली बार मडपैक ट्रीटमेंट के जरिए सफाई की गई थी।

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मुल्तानी मिट्टी के लेप से मिटाए दाग

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दोनों कब्रों पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाकर गंदगी और दाग मिटाए। ताजमहल के तामीर होने के 368 साल बाद यह पहला मौका था जब एएसआई ने कब्रों पर मुल्तानी मिट्टी लगाकर मडपैक ट्रीटमेंट से सफाई की।

एएसआई अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डॉ. एमके भटनागर ने इस काम को अंजाम देने की शुरूआत कराई थी। इन कब्रों के ऊपर लगे फानूस को भी उतारकर केमिकल ट्रीटमेंट कर चमकाया गया। यह फानूस लार्ड कर्जन ने 1908 में भेंट किए थे। मिस्र के काइरो में बनी मस्जिद में देखकर लैंप को डिजाइन कराकर भेंट किया गया था।

रॉयल गेट के पत्थरों को भी साफ किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के लिए रॉयल गेट के रेड सैंड स्टोन प्लेटफार्म और रॉयल गेट के अंदर के पत्थरों की भी सफाई की गई थी। रॉयल गेट से लेकर संगमरमरी गुंबद तक फव्वारों के दोनों ओर के पाथवे के पत्थरों का केमिकल ट्रीटमेंट किया गया। 

गुंबद के अंदर कब्रों के बाहर लगी संगमरमरी जाली और उत्तर दिशा में यमुना किनारे की संगमरमरी दीवार को भी साफ किया गया। इसी दीवार पर कीड़ों के हरे दाग लगते रहे हैं।
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राष्ट्रपति को नहीं झुकना था

हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप वास्तविक कब्रों का दौरा नहीं कर सकते थे, क्योंकि प्रवेश द्वार पांच फीट ऊंचा है। वहीं राष्ट्रपति की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली टीम ने प्रोटोकॉल के अनुसार सूचित किया था कि राष्ट्रपति किसी भी परिस्थिति में झुकेंगे नहीं, चाहे फिर भले ही यह 17वीं शताब्दी की बनी कब्रें देखने के लिए ही क्यों ना हो।
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