अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ने राष्ट्रपति ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को अवैध ठहराया। इसके बाद से अमेरिकी राजनीति में सियासी और व्यापारिक दोनों तरह भूचाल देखने को मिल रहे है। फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने 10% अस्थायी अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का एलान कर दिया। ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह अदालत को जवाब है या एक नई रणनीति? भारत को मिली राहत स्थायी है या आगे और झटके संभव हैं? आइए यहां ट्रंप के टैरिफ का पूरा खेल समझते हैं।
दुनिया भर में अमेरिकी टैरिफ को लेकर फिर हलचल तेज हो गई है। इसका बड़ा कारण है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक आयात शुल्क को 6-3 के बहुमत से रद्द कर बड़ा झटका दिया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से आगे बढ़कर ये टैरिफ लगाए थे, जो कि गैरकानूनी हैं। इस फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने 20 फरवरी को हीं एक नया एलान कर वैश्विक जगत में टैरिफ को लेकर हलचल और बढ़ा दी है। ट्रंप के एलान में कहा गया है कि 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत का अस्थायी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता फिर बढ़ गई है।
हालांकि अजय श्रीवास्तव के अनुसार अब केवल 55 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर यह 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। करीब 40 प्रतिशत सामान पहले से ही छूट की श्रेणी में है। लेकिन स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर 50 प्रतिशत और कुछ ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत का सेक्टोरल टैरिफ अभी भी जारी रहेगा।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का रुख
टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं हुआ है और भारत के साथ व्यापार समझौता जारी रहेगा। बता दें कि इससे पहले, जब दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा घोषित किया था, तब ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से सीधे या परोक्ष रूप से ऊर्जा आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने का वादा किया है।
अब समझिए भारत-अमेरिका व्यापार का हाल
गौरतलब है कि साल 2021 से 2025 के बीच अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है। आयात में हिस्सेदारी 6.22 प्रतिशत है। कुल द्विपक्षीय व्यापार में हिस्सा 10.73 प्रतिशत है। इतना ही नहीं वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच कुल व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें 86.5 अरब डॉलर का निर्यात और 45.3 अरब डॉलर का आयात शामिल है।