केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया है कि खानपान के बिल पर सर्विस चार्ज अनिवार्य नहीं है और ग्राहक यदि होटल या रेस्तरां की सेवा से असंतुष्ट है तो वह इस शुल्क का भुगतान नहीं करने का विकल्प चुन सकता है, लेकिन नेशनल रेस्त्रां एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर ग्राहकों को सर्विस चार्ज नहीं देना है तो वे रेस्त्रां में खाना न खाएं। साथ ही, एसोसिशन ने साफ किया है रेस्त्रां द्वारा लगाया जाने वाला सर्विस चार्ज पूरी तरह से उपभोक्ता कानून के तहत है, जब तक कि रेस्त्रां द्वारा ग्राहक से अनुचित चार्ज न वसूला जाए।
देशभर के रेस्त्रां का प्रतिनिधित्व करने वाली एसोसिशन के अध्यक्ष रियाज अमलानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि उपभोक्ता कानून के तहत रेस्त्रां द्वारा ग्राहकों पर गलत सर्विस चार्ज लगाना और फिर उसे जबरन वसूलना गलत है।
आपको बता दें कि सोमवार को केंद्र सरकार ने राज्यों से भी यह सुनिश्चित करने को कहा है कि होटल-रेस्त्रां परिसर में इस तरह की जानकारी जरूर चस्पा की जाए जिसमें लिखा हो खानपान के बिल पर सर्विस चार्ज अनिवार्य नहीं है। केंद्रीय खाद्य उपभोक्ता मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘उपभोक्ताओं की ओर से कई सारी शिकायतें आई हैं कि होटलों और रेस्तराओं में टिप्स के नाम पर 5-10 प्रतिशत तक सर्विस चार्ज लिया जाता है जिस वजह से ग्राहकों को मजबूरन उसका भुगतान करना पड़ता है, चाहे वे उनकी सेवाओं से असंतुष्ट ही क्यों न हों।’