एक जमाने में यूपी की राजनीति में अनदेखा रहने वाले पूर्वांचल का दबदबा अब भाजपा के युग में भरपूर बढ़ा है। केंद्र से लेकर राज्य की सरकार में जिधर देखों उधर ही पूर्वांचल का दबदबा है। तो सूबे की सियासत पर लंबे समय तक पकड़ रखने वाले पश्चिम और मध्य क्षेत्र का रसूख भगवा युग में कम हुआ है।
नजर दौडाएं तो पीएम मोदी से लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सभी का संबंध पूर्वी यूपी से ही है। अब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का ताज भी पूर्वांचल के महेंद्र पांडे के सिर गया है। तो केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा कहने को दोनों ही नेता मध्य यूपी के प्रतिनिधित्व के रूप में उपमुख्यमंत्री पद का निर्वाह कर रहे हैं। लेकिन इनपर लगी राजनीतिक छाप और लोकप्रियता भी पूर्वी यूपी की ही है।
प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक में पश्चिमी यूपी की अनदेखी ही नजर आ रही है। हालांकि इस आशय की शिकायत भाजपा नेतृत्व के सामने सूबे का संघ पहले कई दफे रख चूका है। लेकिन उसके बातों को तवज्जों मिलती नहीं दिख रही है।
मोदी मंत्रिमंडल में बालियान के रूप में इकलौता प्रतिनिधित्व
राम शंकर कथेरिया को मंत्री पद से हटाए जाने के बाद पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में संजीव बालियान के रूप में इकलौता प्रतिनिधित्व बचा है। लेकिन उनसे भी त्यागपत्र मांग लिए जाने की चर्चाएं हैं। हालांकि उनकी जगह सत्यपाल सिंह को मंत्री बनाकर भाजपा आलाकमान भरपाई को थामने के मूड में है। बावजूद उसके प्रदेश से लेकर केंद्र की सियासत में पश्चिमी यूपी का दबदबा कम ही नजर आ रहा है।
पश्चिम क्षेत्र के नेताओं को भाजपा अध्यक्ष पद मिलने की पूरी उम्मीद थी। मगर सूबे में ब्राहण समीकरण को साधने के कवायद में पार्टी ने इस पद पर महेंद्र पांडे को बैठा दिया है। इसके वजह से पश्चिम के नेताओं की यह उम्मीद भी अधूरी रह गई। सूबे से संबंध रखने वाले संघ के शीर्ष नेताओं को आशंका सता रही है कि बसपा प्रमुख मायावती कहीं पश्चिम की अनदेखी को सियासी मुद्दा न बना दें। वृंदावन में शाह को इस मामले पर संघ को सफाई देनी पड़ सकती है।