बच्चों के लिए वर्ष 2020 कैसा रहा है, इस बारे में बात करते हुए सर्वोच्च बाल अधिकार संस्था राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि देश में बच्चों के लिए शिक्षा सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को ऑनलाइन तरीके से शिक्षित करने की आदत नहीं थी, लेकिन जब कोविड-19 आया तो यह हमारे लिए एक चुनौती थी। हालांकि, हमने अलग-अलग तरीकों से इससे निपटने का प्रयास शुरू कर दिया है और अब स्थिति में सुधार हो रहा है। हम यह सुनिश्चित करने में सफल रहे कि बच्चे अपने स्कूलों के संपर्क में रहें चाहे वह निजी हो या सरकारी स्कूल।
प्रियांक कानूनगो ने कहा कि शिक्षकों और आंगनवाड़ियों द्वारा निभाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बच्चों के घरों तक दोपहर का भोजन वितरित करना था और उन्होंने इस दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। महामारी के कारण स्कूली बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर में वृद्धि होने की आशंकाओं पर कानूनगो ने कहा कि स्कूलों के दोबारा खुलने से पहले ऐसी आशंका होना सही नहीं है।
कुपोष के शिकार हुए बच्चे
उन्होंने कहा कि एक बार स्कूल जब फिर से खुल जाएंगे, तो हम बच्चों को स्कूलों में लेकर आएंगे। वास्तव में ऑनलाइन शिक्षा ने सभी बच्चों को स्कूलों के संपर्क में रखा है। दिसंबर में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- पांच ने एक गंभीर परिदृश्य पेश किया जिसके अनुसार 2015-16 से 2019-20 में बच्चों में कुपोषण बढ़ गया।
मंत्रालय के लिए बच्चों के खिलाफ अपराध एक और चिंता का विषय रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संसद को सूचित किया था कि एक मार्च से 18 सितंबर तक बाल पोर्नोग्राफी, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की कुल 13,244 शिकायतें दर्ज की गईं।