ये उस लड़ाकू विमान राफेल की स्पीड है, जिसकी खरीदारी में घपला करने का आरोप
ने लगाया है। राहुल गांधी ने मंगलवार को फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदे को घोटाला बताते हुए कहा, ''एक कारोबारी' को लाभ पहुंचाने की मंशा से सौदे को बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी खुद पेरिस गए थे।''
राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ''रक्षा मंत्री कहती हैं कि प्रत्येक राफेल जेट की कीमत के लिए पीएम मोदी और उनके 'भरोसेमंद' साथी ने जो बातचीत की, वो गोपनीय है।'' राहुल ने तंज कसा, ''रफाल की कीमत के बारे में संसद को बताना राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है और जो इस बारे में पूछे, उसे एंटी-नेशनल बता दो।''
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एमवी राजीव गौड़ा ने संसद में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से राफेल समझौते की कीमत और सौदे को लेकर कई सवाल किए थे। इसके जवाब में सीतारमण ने कहा, ''आर्टिकल 10 के मुताबिक, सौदे की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी। साल 2008 में दोनों देशों के बीच हुए इंटर गवर्मेंट एग्रीमेंट के तहत ऐसा किया जाएगा। इस विमान को बनाने वाली कंपनी डास्सो (Dassault) से मीडियम मल्टी रोल कॉम्बेट एयरक्राफ्ट के लिए कोई समझौता नहीं हुआ है।''
कांग्रेस के मोदी सरकार से सवाल?
निर्मला सीतारमन के इस जवाब और राहुल गांधी के आरोपों के बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुछ सवाल पूछे। ''यूपीए सरकार के वक्त एक राफेल की कीमत 526 करोड़ थी। लेकिन जो सुनने में आया वो ये कि मोदी सरकार ने एक रफाल 1570 करोड़ रुपये में खरीदा। यानी करीब तीन गुणा। ये सच है या नहीं, ये कौन बताएगा। इस नुकसान का जिम्मेदार कौन है?
साल 2016 में फ्रांस में जो समझौता हुआ, उससे पहले सुरक्षा पर बनी कैबिनेट कमिटी से मंजूरी क्यों नहीं ली गई। प्रक्रिया क्यों नहीं मानी गई। क्या भ्रष्टाचार का केस नहीं बनता?
देश की जरूरत 126 विमानों की थी। मोदी गए और जैसे संतरे खरीदे जाते हैं, वैसे राफेल विमान खरीद लिए गए। नवंबर 2017 में रक्षा मंत्री ने कहा कि 36 राफेल इमरजेंसी में खरीदे गए। अगर ऐसा है तो समझौता होने के इतने महीनों बाद भी एक रफाल भारत को अब तक क्यों नहीं मिला?'' कांग्रेस के इन सवालों पर सरकार की तरफ से कोई जवाब अब तक नहीं आया है।