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क्या सीबीआई अदालत से पी चिदंबरम का नार्को टेस्ट चाहती है?

Tue, 27 Aug 2019 06:48 PM IST
अमर शर्मा शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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पी चिदंबरम - फोटो : PTI
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पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम 30 अगस्त तक सीबीआई की रिमांड पर हैं। सीबीआई अदालत में लगातार आरोप लगा रही है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री जांच में सहयोग नहीं दे रहे हैं। जांच एजेंसी के सवालों का सीधे जवाब नहीं दे रहे हैं। सीबीआई और ईडी दोनों ही जांच एजेंसियां आईएनएक्स मीडिया मामले में चिदंबरम पर मुख्य षडयंत्रकारी तक का आरोप लगा चुकी हैं। दोनों ही जांच एजेंसियों का आरोप हैं कि उनके पास चिदंबरम के खिलाफ जांच के पर्याप्त आधार हैं, लेकिन वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सीबीआई पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम का नार्को टेस्ट चाहती है?

सुब्रमण्यम स्वामी ने जताई आशंका

राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस तरह की आशंका जताई है। सुब्रमण्यम स्वामी ने बाकायदा ट्वीट करके भी कहा है कि यदि पी चिदंबरम इसी तरह से जांच में असहयोग करते रहेंगे तो सीबीआई उनका नार्को टेस्ट कराने की मांग कर सकती है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकील बीएनपी पाठक भी सुब्रमण्यम स्वामी की आशंका से सहमत हैं। पाठक का कहना है कि 20 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के फैसले में काफी कुछ कहा है। बीएनपी पाठक का कहना है कि 20 अगस्त के बाद से लगातार जांच एजेंसी अदालत में चिदंबरम के सहयोग न करने का सवाल उठा रही हैं। इसके बहाने जहां सीबीआई चिदंबरम से पूछताछ और मामले की जांच के उनके हिरासत की अवधि बढ़ाना चाहती है, वहीं वह अदालत से कुछ और अनुमति मांग सकती है।

चिदंबरम के वकील भी हैं सावधान

चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी सीबीआई की तरफ से पेश हो रहे सालिसीटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील को लेकर काफी सावधान हैं। तुषार मेहता लगातार चिदंबरम पर जांच में सहयोग न करने, सवालों का सीधे जवाब न देने, उसमें समय लेने का आरोप लगा रहे हैं। इसके अलावा हर बार अदालत में पेशी के दौरान सीबीआई और ईडी दोनों एजेंसियां अदालत में नए तथ्यों के साथ पेश हो रही हैं। जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ के सामने कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने आवेदन करके 19 दिसंबर 2018, 1 जनवरी और 21 जनवरी 2019 को हुई पूछताछा का ब्यौरा ईडी से मंगाए जाने का अनुरोध किया है। ताकि यह पता चल सके कि पी चिदंबरम ने जांच में सहयोग किया है अथवा नहीं। क्योंकि जांच एजेंसी बार-बार चिदंबरम पर जांच में सहयोग न करने का आरोप लगा रही है। 

क्या हैं जांच एजेंसियों की अगली रणनीति

सीबीआई और ईडी ने दर्जन भर से अधिक देशों में पी चिदंबरम परिवार की संपत्ति होने और इसकी जांच किए जाने की जरूरत बताई है। इसके लिए जांच एजेंसियां ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, बारमूडा़, मॉरिशस, सिंगापुर जैसे देशों में पी चिदंबरम परिवार की संपत्तियों की जांच के लिए लेटर ऑफ रोगेटरी की तैयारी में लगी हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऑस्ट्रिया, ब्रिटिश वर्जिन आईसलैंड, फ्रांस, फिलीपींस, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, ग्रीस, श्रीलंका, मलयेशिया, मोनाको में पी चिदंबरम के परिवार से जुड़ी संपत्ति है। हालांकि पी चिदंबरम ने अदालत को बताया कि है कि विदेश में उनकी जिस संपत्ति और बैंक खाते का विवरण जांच एजेंसियों द्वारा दिया जा रहा है, वह सभी वैध हैं। चिदंबरम ने इससे जुड़े जांच एजेंसी के आरोप को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने हलफनामा दायर करके कहा है कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।
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