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बंगाल ही नहीं, देशभर के इन जगहों पर पहले भी डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज हो चुके हैं बेहाल

Sat, 15 Jun 2019 01:00 PM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हड़ताल पर एकजुट हैं कई शहरों के डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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पश्चिम बंगाल के कोलकाता में मरीज के परिजनों ने एक डॉक्टर के साथ मारपीट की और इस घटना ने देश के कई शहरों में बवाल खड़ा कर दिया। स्वास्थ्य सेवाओं पर आफत बनकर बरसा कोलकाता के डॉक्टरों का आक्रोश देश की राजधानी दिल्ली तक आ पहुंचा। देश के कई शहरों में डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं और स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है। 

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एक रिपोर्ट के अनुसार देश में पहले से ही स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी  है। न केवल संसाधनों, बल्कि डॉक्टरों की भी बड़े स्तर पर कमी है। ऐसे में एक दिन की हड़ताल से भी मरीजों की जान पर बन आती है, जबकि हड़ताल ज्यादा दिन तक होने की स्थिति में मरीज की मौत भी हो जाती है।

यह कोई पहला मौका नहीं है, जब इतने बड़े स्तर पर डॉक्टरों की हड़ताल हुई है और मरीजों की जान पर आफत बन आई है। हाल के कुछ सालों की घटनाओं पर नजर डालें तो कभी आपसी टकराव, कभी अभद्रता और मारपीट, कभी वेतन में देरी तो कभी सरकार से टकराव के कारण डॉक्टर हड़ताल पर जाते रहे हैं। हड़ताल की वजहें चाहे जो भी हों, लेकिन हरेक स्थिति में मरीजों की ही जान सांसत में होती है, आफत उन्हीं पर बरसती है। 
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 एक नजर डालते हैं हड़ताल की ऐसी ही घटनाओं परः

मई, 2019: वेतन में देरी से हड़ताल

पिछले दिनों दिल्ली में एनडीएमसी की ओर से चलाए जा रहे हिंदू राव अस्पताल में 500 रेजीडेंट डॉक्टरों ने वेतन आने में हुई देरी से नाराज चल रहे थे। 1200 बेड वाला यह एमसीडी का सबसे बड़ा अस्पताल है, जहां डॉक्टरों के महज तीन घंटे की हड़ताल से सैकड़ों मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। 

मार्च, 2019: महिला डॉक्टर संग दुर्व्यवहार

राजस्थान की राजधानी जयपुर में सैकड़ों मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था, जब शहर के कांवटिया अस्पताल में एक महिला रेजीडेंट डॉक्टर से एक मरीज के परिजनों के दुर्व्यवहार के बाद नाराज डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। बाद में शहर के कई अन्य अस्पतालों के डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए थे। 

जनवरी, 2019: हेड कांस्टेबल के बेटे ने की थी मारपीट

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज कराने आए दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल के बेटे ने वहां के एक रेजीडेंट डॉक्टर से मारपीट की थी। इस घटना से नाराज डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी थी। इस कारण अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो गई थी और सैकड़ों मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। 

अगस्त, 2018: जूनियर डॉक्टर की पिटाई के बाद बिगड़ा माहौल

बिहार की राजधानी पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर की पिटाई के बाद माहौल बिगड़ गया था। पिटाई के विरोध में न केवल यहां के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर गए, बल्कि उनके साथ पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) और दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल समेत कई अन्य शहरों के जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए थे।  जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने के कारण 12 से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई थी। 

अप्रैल 2018: सीनियर-जूनियर की तनातनी से एम्स में हुई थी हड़ताल

दिल्ली के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आई सेंटर के चीफ डॉक्टर और जूनियर डॉक्टरों के बीच किसी बात पर तनातनी बढ़ गई थी, जिसको लेकर यहां के करीब 1800 रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। इस हड़ताल के बाद एम्स के सारे ऑपरेशन रद्द करने पड़े थे। यही नहीं, यहां की ओपीडी सेवाएं भी बुरी तरह चरमरा गई थी। 

दिसंबर, 2017: सरकार से टकराव, डॉक्टरों की गिरफ्तारी

दिसंबर 2017 में राजस्थान सरकार और डॉक्टरों के बीच आपसी टकराव के कारण डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे।  इस हड़ताल के बीच सैकड़ों ऑपरेशन टाल दिए गए थे और कुछ मरीजों की मौत भी हो गई थी। इस हड़ताल के दौरान 50 से ज्यादा डॉक्टरों की गिरफ्तारी भी हुई थी। 
 
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नवंबर, 2017: राजस्थान के कई जिलों पर असर

अपनी मांगों के समर्थन में राजस्थान के 640 सरकारी डॉक्टरों ने छह नवंबर को हड़ताल शुरू कर दी थी। इस हड़ताल से राज्य के कई जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई थी। कोटा और झालावाड़ मेडिकल कॉलेजों के करीब 350 रेजिडेंट डॉक्टर इस हड़ताल में शामिल थे, जिस कारण कोटा, बूंदी और झालावाड़ समेत कई जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई थीं।
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