राजस्थान की राजधानी जयपुर में सैकड़ों मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था, जब शहर के कांवटिया अस्पताल में एक महिला रेजीडेंट डॉक्टर से एक मरीज के परिजनों के दुर्व्यवहार के बाद नाराज डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। बाद में शहर के कई अन्य अस्पतालों के डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए थे।
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज कराने आए दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल के बेटे ने वहां के एक रेजीडेंट डॉक्टर से मारपीट की थी। इस घटना से नाराज डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी थी। इस कारण अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो गई थी और सैकड़ों मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी।
बिहार की राजधानी पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर की पिटाई के बाद माहौल बिगड़ गया था। पिटाई के विरोध में न केवल यहां के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर गए, बल्कि उनके साथ पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) और दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल समेत कई अन्य शहरों के जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए थे। जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने के कारण 12 से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई थी।
दिल्ली के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आई सेंटर के चीफ डॉक्टर और जूनियर डॉक्टरों के बीच किसी बात पर तनातनी बढ़ गई थी, जिसको लेकर यहां के करीब 1800 रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। इस हड़ताल के बाद एम्स के सारे ऑपरेशन रद्द करने पड़े थे। यही नहीं, यहां की ओपीडी सेवाएं भी बुरी तरह चरमरा गई थी।
दिसंबर 2017 में राजस्थान सरकार और डॉक्टरों के बीच आपसी टकराव के कारण डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। इस हड़ताल के बीच सैकड़ों ऑपरेशन टाल दिए गए थे और कुछ मरीजों की मौत भी हो गई थी। इस हड़ताल के दौरान 50 से ज्यादा डॉक्टरों की गिरफ्तारी भी हुई थी।
अपनी मांगों के समर्थन में राजस्थान के 640 सरकारी डॉक्टरों ने छह नवंबर को हड़ताल शुरू कर दी थी। इस हड़ताल से राज्य के कई जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई थी। कोटा और झालावाड़ मेडिकल कॉलेजों के करीब 350 रेजिडेंट डॉक्टर इस हड़ताल में शामिल थे, जिस कारण कोटा, बूंदी और झालावाड़ समेत कई जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई थीं।