देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से हालात बेकाबू होते जा रहे है। इस बीच डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी भी दिन रात अपनी मेहनत से लोगों को संक्रमण से बचाने में जुटे हुए हैं। इस कठिन दौर में डॉक्टरों को भी अपने इलाज के लिए दर दर भटकना पड़ा रहा हैं। कोरोना संक्रमित होने के बाद डॉक्टर्स को अस्पतलों में न ऑक्सीजन मिल पा रहा है न ही बेड। डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मी एबुलेंस में दम तोड़ रहे है। ऐसे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे है। डॉक्टर्स और उनके परिजन की परेशानियों को देखते हुए वरिष्ठों डॉक्टरों ने आईएमए से इस मामले में दखल देने का अनुरोध किया है। उनकी मांग है कि आईएमए देशभर में अपने गेस्ट हाउस को कोविड केयर सेंटर में तब्दील करे। जिसमें डॉक्टर्स का इलाज हो सके।
मध्यप्रदेश इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से निकले और 50 वर्षों से दिल्ली में कार्यरत डॉ. हरीश भल्ला ने अमर उजाला से कहा, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन को कोरोना महामारी के दौर में डॉक्टरों की सुरक्षा और उनके उपचार की व्यवस्था को लेकए एक पत्र लिखा है। हमने आईएमए से अनुरोध किया है कि, आज कोरोना संक्रमित होने के बाद डॉक्टर और उनके परिजन को भी किसी भी अस्पताल में एडमिट करने के लिए जगह नहीं मिल रही है। इससे वे लोग बेहद परेशान है। आज आईएमए के पास देशभर में सर्वसुविधा युक्त गेस्ट हॉउस, ऑडिटोरियम और बड़े हॉल है। हमारी मांग है कि इनका उपयोग डॉक्टर और उनके परिजन के लिए होना चाहिए। यहां कोविड केयर सेंटर और आइसोलेशन सेंटर खोला जाना चाहिए ताकि इनका इलाज ठीक तरीके से यहां हो सके।
डॉ.भल्ला ने आरोप लगाते हुए कहा कि, आज बड़ी संख्या में डॉक्टर और उनके परिवार के सदस्य बीमार हो रहे है। वे दर दर भटक रहे है लेकिन कही कोई जगह नहीं मिल रही है। इस पर आईएमए पूरी तरह से चुप्प है। इस संकट की घड़ी में ये भी आईएमए डॉक्टरों के काम नहीं आ रहा है। केवल सरकार को पत्र लिखकर खानापूर्ति करने का दिखावा कर रहा है।
प्रैक्टली नहीं है संभव:आईएमए
इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के महासचिव डॉ. जयेश लेले ने अमर उजाला से कहा, ये प्रैक्टली तौर पर बिल्कुल संभव नहीं है क्योंकि सभी कार्यालय में लोग काम भी करते है। इस बीच में अगर कोई कोरोना संक्रमित वहां आता है तो अन्य लोगों में भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। जहां तक तक गेस्ट हाउस में सेंटर खोलने का सवाल है तो वहां सभी सुविधाएं जुटाना भी असंभव है।
वहीं दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.जीएस ग्रेवाल ने अमर उजाला को बताया कि, हमारे स्थानों पर कोविड केयर सेंटर और आइसोलेशन सेंटर खोल भी दिया तो उनमें आक्सीजन समेत अन्य सुविधाएं कौन मुहैया करवाएं ये सबसे बड़ा सवाल है। जो भी कोविड केयर सेंटर होता है वो किसी अस्पताल से जुड़ा होता है। उसमें तमाम प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं होती है इसलिए प्रैक्टली तौर ये बिल्कुल संभव नहीं है।
आईएमए अपनी ही कम्युनिटी के लिए कुछ नहीं करता
दिल्ली डायबिटीज रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉ.अशोक झिंगन ने अमर उजाला से कहा,आज सरकारी हो या प्राइवेट हॉस्पिटल कही भी डॉक्टर और स्वास्थ्यर्मियों को बेड ही नहीं मिल रहा है। आए दिन ऐसे मामले में देखने को मिल रहे है कि जो डॉक्टर जिस भी अस्पताल में अपनी सेवा दे रहे है उन्हें भी वहां उपचार के लिए बेड नहीं मिल रहा है। कई डॉक्टर्स और स्वास्थ्यर्मियों ने तो एंबुलेंस में बैठे बैठे ही अपनी जान तोड़ दी।
आज आईएमए ने अपने डॉक्टर्स की सुविधाओं के लिए देशभर में गेस्ट हॉउस और हॉल बना रखे है। ऐसे समय में अगर इनमें कोविड केयर सेंटर या आइसोलेशन सेंटर बनाया जाता है तो डॉक्टर्स को बड़ी राहत मिलेगी। डॉक्टर्स के मन भी विश्वास रहेगा कि अगर वे लोगों के इलाज के दौरान संक्रमित होते है तो उन्हें अपने उपचार के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ेगा। वहां आसानी से सुविधा मिल सकेगी। उनके वह उनके परिवार का ठीक से इलाज हो सकेगा। आज अगर आईएमए अपनी ही कम्युनिटी के लिए कुछ नहीं कर सकता तो बाकि के लिए क्या करेगा।