साल 2017 में रूरल हेल्थ स्पेशलिस्ट रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में विशेषज्ञों की संख्या काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार पेडियट्रिशियन, सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञों के स्वीकृत 22,496 पदों में से 18,347 खाली थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये सैलरी नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत मंजूर की गई हैं। यही एक रास्ता है ग्रामीण इलाकों तक बेहतर स्वस्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का। इसी कारण डॉक्टरों को अधिक सैलरी दी जा रही है। कई राज्यों में तो डॉक्टरों से खुद पूछा जा रहा है कि वह कितनी सैलरी लेना चाहते हैं।
मेवात के सिविल सर्जन संत लाल वर्मा का कहना है कि डॉक्टरों को सैलरी अधिक मिल रही है लेकिन फिर भी वह ग्रामीण इलाकों में नहीं जाना चाहते। इसके पीछे कई वजह हैं, जैसे वहां कम सुविधाओं का होना, अच्छे स्कूलों की कमी, जीवन गुणवत्ता का बेहतर न होना। उन्होंने बताया कि अभी वह एक दंपत्ति को नियुक्त कर रहे हैं।
पति पेडियट्रिशियन है और पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ। स्त्री रोग विशेषज्ञों को 2.5 लाख रुपये और पेडियट्रिशियन को 2 लाख रुपये तक दिए जा रहे हैं। अभी इस दंपत्ति से बात की जा रही है जिसमें इन्होंने मांग की है कि पेडियट्रिशियन को भी 2.5 लाख रुपये दिए जाएं और रहने की व्यवस्था भी की जाए। इससे पहले इन्हें प्रति माह 80 हजार से 1 लाख रुपये तक ही मिल रहे थे।