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डॉक्टर हों या मरीज, सबको कोरोना संक्रमण से बचा रही टेलीमेडिसिन, पढ़ें कैसे हो रही है कारगर

Wed, 10 Jun 2020 07:13 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कोरोना काल में अस्पतालों में पहुंचने से डर रहे लोग, संक्रमण का खतरा कम करने के लिए अपना रहे टेलीमेडिसिन की सुविधा            
  • डॉक्टरों को भी खूब भा रही टेलीमेडिसिन की स्टाइल, आने वाले समय में टेलीमेडिसिन का उपयोग बढ़ने की उम्मीद  
  • विशेषज्ञों का अनुमान, आने वाले समय में देश में टेलीमेडिसिन से सर्जरी तक होन होगा संभव 
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Telemedicine - फोटो : अमर उजाला (सांकेतिक)
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। संक्रमण के डर से अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग भी अस्पतालों में आने से डर रहे हैं, तो डॉक्टरों को भी खुद के संक्रमित होने का डर सता रहा है।

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ऐसे समय में टेलीमेडिसिन बेहतर विकल्प बनकर उभरा है, जिसमें लोग अस्पताल आए बिना ही फोन पर डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण का खतरा आने वाले समय में लंबे समय तक खत्म होने वाला नहीं है और ऐसे समय में टेलीमेडिसिन की प्रक्रिया काफी लोकप्रिय हो सकती है। 
 
मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर अमित कुमार पाण्डेय के मुताबिक कोरोना काल में वे लगातार टेलीमेडिसिन के माध्यम से लोगों का उपचार कर रहे हैं।

फोन पर लोग उनसे अपनी परेशानियां और बीमारी से संबंधित लक्षण बताते हैं और वे उन्हें संबंधित दवा बता देते हैं। आवश्यक होने पर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों की शारीरिक स्थिति देख लेते हैं। इससे मरीज की स्थिति समझने में पूरी मदद मिल जाती है। 

टेलीमेडिसिन से कोरोना पीड़ितों का इलाज 

संजय गुप्ता (47 वर्ष) दिल्ली के सब्जी मंडी एरिया में रहते हैं। लगभग 12 दिन पहले उन्हें कोरोना से संबंधित लक्षण पाए गये थे। उन्हें हल्के बुखार और खांसी की समस्या थी। उन्होंने दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन से संपर्क किया।

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इसके बाद हेल्पलाइन से एक डॉक्टर का उन्हें फोन आया। अपने लक्षण बताकर उन्होंने उपचार लेना शुरू किया। उन्होंने बताया कि तब से दिल्ली सरकार के डॉक्टर रोजाना उन्हें फोन कर उनकी स्थिति और लक्षणों के बारे में पूछताछ करते हैं और आवश्यक सलाह देते हैं। 
 
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक़ कम गंभीर लक्षण वाले मरीजों का इसी तरह से इलाज चल रहा है। लोग जरूरत पड़ने पर दवाइयों की सलाह लेते हैं। विशेष स्थिति में उनके सहयोगी मरीजों तक दवाइयां भी पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि टेलीमेडिसिन से इस तरह वे रोजाना लगभग 60-70 कोरोना मरीजों को सलाह दे रहे हैं। 

सर्जरी तक पहुंचने में लगेगा समय 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर राजन शर्मा के मुताबिक अभी हमारे देश में टेलीमेडिसिन की सुविधा बहुत शुरुआती दौर में है, जबकि पश्चिम देशों में यह काफी अधिक प्रचलित है, जहां सर्जरी की जटिल प्रक्रियाओं के दौरान भी एक्सपर्ट की सलाह टेलीमेडिसिन के जरिये ली जाती है।

यानी अमेरिका के एक हिस्से में किसी मरीज का ऑपरेशन चलता रहता है, जबकि ठीक उसी दौरान किसी दूसरे देश में बैठा विशेषज्ञ अपने सहयोगियों को ऑपरेशन से संबंधित आवश्यक सलाह देता रहता है। 
 
सर्जरी में रोबोट्स का इस्तेमाल बढ़ने के साथ-साथ तकनीकी खामियां काफी कम होती जा रही हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में रोबोट्स के उपयोग बढ़ने के साथ-साथ इसमें टेलीमेडिसिन के उपयोग की संभावनाएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। 
 
उन्होंने बताया कि कोरोना काल के कारण अब यह हमारे यहां भी टेलीमेडिसिन धीरे-धीरे लोकप्रिय होनी शुरू हुई है। हालांकि, भारतीय स्वभाव के कारण अभी भी टेलीमेडिसिन के उपयोग को लेकर लोगों में संकोच बरकरार है, लेकिन इसके बाद भी यह लोगों की जरूरत बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में यह काफी लोकप्रिय हो सकता है।

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