नर्सों को नहीं मिल रही पर्याप्त सुविधाएं
दिल्ली नर्सेज फेडरेशन के महासचिव लीलाधर रामचंदानी ने कहा कि एक नर्स को एक हफ्ते में 40 घंटे की ड्यूटी की अपेक्षा की जाती है, लेकिन कोरोना काल में स्टाफ पर भारी दबाव के कारण उन्हें 50 से 60 घंटे तक की अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके बाद भी उन्हें पर्याप्त अवकाश नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण उनमें तनाव और चिंता बढ़ रही है। इससे नर्सों की क्षमता पर असर पड़ रहा है।
लीलाधर रामचंदानी ने कहा कि जीबी पंत अस्पताल में अपनी ही नर्सों के बीमार होने पर उन्हें अपने ही अस्पताल में इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल के किसी कर्मचारी के संक्रमित हो जाने पर उन्हें एलएनजेपी अस्पताल जाने की सलाह दे दी जाती है, जो पहले से ही मरीजों से पूरी तरह भरा पड़ा है। ऐसे में बीमार नर्सों के इलाज की कोई विशेष सुविधा न होने से उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं।
राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नर्सों ने प्रबंधन को पत्र लिखकर अपने लिए विशेष क्वारंटीन सेंटर बनाने की मांग की है जहां अस्पताल की संक्रमित होने वाली नर्सों को आसानी से रखा जा सके और प्राथमिकता के साथ उनका इलाज किया जा सके।
मौलाना आज़ाद डेंटल कॉलेज के डॉक्टर सचिन ने कहा कि इस बार डेंटल डॉक्टर्स को भी कोरोना ड्यूटी में लगा दिया गया है। यहां वे लोगों का आरटीपीसीआर टेस्ट कर रहे हैं और उन्हें आवश्यक सलाह भी दे रहे हैं। लेकिन यहां दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पर्याप्त पीपीई किट्स, मास्क
कोरोना फेज-1 में डॉक्टरों-नर्सों को पर्याप्त पीपीई किट्स नहीं मिल पा रही थीं। लेकिन उसके बाद इनका तेजी से निर्माण शुरू हुआ और अब उसका असर दिखाई पड़ रहा है। कोरोना के इस संकटकाल में डॉक्टरों-नर्सों और अन्य स्टाफ को पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट्स, सर्जिकल मास्क और सैनिटाइजर जैसी अन्य चीजें मिल पा रही हैं। यही कारण है कि इस बार कोरोना की पहली लहर की तुलना में काफी कम डॉक्टर-नर्स संक्रमित हो रहे हैं।