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जानें, कौन है अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी

Tue, 04 Oct 2016 08:58 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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asiya andrabi - फोटो : Getty Images
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जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उल्‍लेखनीय है कि आसिया उस समय सुर्खियों में आयीं जब श्रीनगर में पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर उसने पाकिस्तानी झंडा फहराया था।
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आसिया ने न केवल पाकिस्तान का झंडा फहराया बल्कि अपने समर्थकों के साथ उसने वहां का राष्ट्र गान भी गाया था। इस मामले में उसपर मुकदमा भी दर्ज किया गया था। आपको बता दें की आसिया अंद्राबी, हुर्रियत की महिला विंग 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' (डॉटर ऑफ नेशन) की चीफ हैं और जानी-मानी अलगावावादी नेता हैं। इस संगठन का उद्देश्य रहा है कि कश्मीर में इस्लामिक कानून लाया जाए और इसे भारत से अलग किया जाय।

इससे पूर्व 28 अगस्त 2010 को आसिया को देश में गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने, हिंसा फैलाने और देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनके पति आशिक हुसैन फक्तू हैं जिन्होंने 22 वर्ष जेल में काटा है। साथ ही सितंबर 2013 में आसिया के तीन भतीजों को आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के आधार पर गिरफ्तार किया था।
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...जब शरीफ ने लिखा था आसिया को खत 

नवाज शरीफ
असिया अंद्राबी के न केवल हाफिज सईद जैसे आतंकियों से रिश्ते बताए जाते हैं बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी खुलकर तारीफ करते हैं। पिछले दिनों शरीफ ने आसिया अंद्राबी को एक खत लिखा था, जिसकी मीडिया में खूब चर्चा हुई थी।  

नवाज शरीफ ने महिला अलगाववादी संगठन 'दुख्‍तरन-ए-मिल्लत' की नेता आसिया अंद्राबी को पत्र लिखकर उनकी भूमिका की सराहना की थी।

उन्होंने अपनी सरकार की ओर से नैतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग की प्रतिबद्धता जताई थी। शरीफ ने कहा था कि यह दलील वाजिब नहीं है कि कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पुराने हो चुके हैं तथा उन्होंने इन प्रस्तावों को जल्द लागू करने का आह्वान किया। 
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आस‌िया ने भी लिखी थी नवाज शरीफ को चिट्ठी 

नवाज शरीफ - फोटो : Getty Images
पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री ने यह पत्र आसिया अंद्राबी की ओर से भेजी गई चिट्ठी के जवाब में लिखा था। आसिया ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार की नीति को लेकर संतोष प्रकट किया था। आसिया ने लिखा था, 'आपकी ओर से मौजूदा रणनीति में विश्वास प्रकट करना मेरे लिए संतोष का विषय है। कश्मीर मुद्दे को पाकिस्तान भौगोलिक अथवा सीमा विवाद के तौर पर नहीं देखता। जहां तक हमारा सवाल है तो यह मुद्दा 1947 में भारत के बंटवारे के साथ जुड़े फार्मूले के क्रियान्वयन से संबंधित है।' 

भारत पर निशाना साधते हुए शरीफ ने कहा था, 'मुद्दे को लंबे समय तक बनाए रखने का यह मतलब नहीं है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र प्रस्ताव अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं।'

उन्होंने खत में आगे लिखा था, 'अतीत में पाकिस्तान कश्मीरियों को उनके संघर्ष के लिए नैतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग प्रदान करने में पीछे नहीं रहा है और इंशा अल्ला आगे भी वह कश्मीरियों के साथ अधिक प्रतिबद्धता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहना जारी रखेगा।'
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