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Jagdeep Dhankhar: 'वीआईपी दर्शन का विचार ही दैवीयता के खिलाफ', उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने की ये अपील

Tue, 07 Jan 2025 07:55 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मस्थल

सार

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंदिरों में दर्शन के लिए वीआईपी संस्कृति को खत्म करने की अपील की है। उपराष्ट्रपति ने ये बात कर्नाटक के धर्मस्थल में श्री मंजूनाथ मंदिर में देश के सबसे बड़े 'क्यू कॉम्प्लेक्स' का उद्घाटन के बाद कही है। इस सुविधा को 'श्री सानिध्य' के नाम से जाना जाता है।
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श्री मंजूनाथ मंदिर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ - फोटो : PTI
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विस्तार
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को कहा कि हमें वीआईपी संस्कृति को खत्म कर देना चाहिए, खासकर मंदिरों में, क्योंकि वीआईपी दर्शन का विचार ही ईश्वर के खिलाफ है। उन्होंने लोगों से विघटनकारी राजनीति से ऊपर उठने और देश को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करने का आह्वान किया।
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वीआईपी संस्कृति एक अतिक्रमण है- धनखड़
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आगे कहा, 'जब किसी को वरीयता दी जाती है और प्राथमिकता दी जाती है - जब हम उसे वीवीआईपी या वीआईपी कहते हैं - तो यह समानता की अवधारणा को कमतर आंकना है। वीआईपी संस्कृति एक विचलन है, यह एक अतिक्रमण है। समानता के नजरिए से देखा जाए तो समाज में इसका कोई स्थान नहीं होना चाहिए, धार्मिक स्थलों में तो बिल्कुल भी नहीं।'

मंदिरों से वीआईपी संस्कृति को खत्म करें- धनखड़ - फोटो : PTI
श्री मंजूनाथ मंदिर में 'क्यू कॉम्प्लेक्स' का उद्घाटन
कर्नाटक के दौरे पर पहुंचे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने धर्मस्थल में श्री मंजूनाथ मंदिर में देश के सबसे बड़े 'क्यू कॉम्प्लेक्स' का उद्घाटन किया है। इस सुविधा को 'श्री सानिध्य' के नाम से जाना जाता है। हेगड़े की तरफ से परिकल्पित, नई सुविधा मौजूदा कतार प्रणाली का एक उन्नत प्रतिस्थापन है। नई कतार प्रणाली कुल 2,75,177 वर्ग फीट क्षेत्र में फैली हुई है। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि इसमें तीन मंजिला परिसर है, जिसमें 16 हॉल हैं, जिनमें से प्रत्येक में 600 से 800 श्रद्धालु बैठ सकते हैं। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि परिसर की कुल क्षमता एक समय में 10,000 से 12,000 श्रद्धालुओं के बीच है।

भगवान मंजूनाथ स्वामी के उपराष्ट्रपति ने किए दर्शन
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपनी पत्नी सुदेश धनखड़ के साथ कार्यक्रम से पहले मंदिर शहर के पीठासीन देवता भगवान मंजूनाथ स्वामी (शिव का एक रूप) के दर्शन किए, साथ ही श्री क्षेत्र धर्मस्थल के धर्माधिकारी डी वीरेंद्र हेगड़े के साथ भी दर्शन किए। उन्होंने नए कतार परिसर 'श्री सानिध्य' का भी दौरा किया और भक्तों को अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करने में मंदिर ट्रस्ट की प्रतिबद्धता की सराहना की।

मंदिरों से वीआईपी संस्कृति को खत्म करें- उपराष्ट्रपति - फोटो : PTI
भारत में हो रहे राजनीतिक परिवर्तन को लेकर जताई चिंता
अपने मुख्य भाषण में उपराष्ट्रपति धनखड़ ने आज के राजनीतिक परिवेश में प्रचलित प्रवृत्ति की आलोचना की, जहां लोग संवाद करने के बजाय लोकतांत्रिक मूल्यों को बाधित करते हैं। उनके अनुसार, भारत में हो रहे राजनीतिक परिवर्तन, भारतीय लोकतंत्र के विरोधी राजनीतिक ताकतों की तरफ से संचालित, 'जलवायु परिवर्तन से भी अधिक खतरनाक हैं'। उन्होंने कहा, 'हमें भारत विरोधी ताकतों को बेअसर करना चाहिए जो विभाजन और गलत सूचना के माध्यम से हमें कमजोर बनाने की कोशिश कर रही हैं। हमें उन्हें हमारे देश के महान नाम और समावेशिता, कल्याण और हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में हासिल की गई सभी उपलब्धियों को कलंकित करने से रोकना चाहिए।' ऐसे समय में जब भारत कई स्तरों पर अपने विकास के साथ आगे बढ़ रहा है।
 
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मंदिरों से वीआईपी संस्कृति को खत्म करें- उपराष्ट्रपति - फोटो : PTI
'विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ शुरू करें नई कहानी'
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि हमें विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ एक नई कहानी शुरू करनी चाहिए और एकजुट, केंद्रित और विकासोन्मुख होने के अपने संकल्प के साथ उन्हें हराना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमारा समाज भौतिकवाद के सिद्धांतों पर नहीं बना है। इसलिए, मैं भारत के कॉरपोरेट्स से आगे आने और सीएसआर फंड का उपयोग करके स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए योगदान देने का आह्वान करता हूं।' उन्होंने आधुनिक भारत के लिए पांच सिद्धांत भी प्रस्तावित किए, जिन्हें उन्होंने जीवंत और समावेशी लोकतंत्र के लिए 'पंच प्राण' कहा। उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव, जो बदले में पारिवारिक स्थिरता और मूल्यों को मजबूत करेगा, पर्यावरण संरक्षण और प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों को मजबूत करेगा, हमारे मूल्य होने चाहिए। लेकिन उनके अनुसार, मौलिक अधिकारों को मौलिक कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें अपने हितों से ऊपर अपने राष्ट्र के लिए काम करना चाहिए।'

अपने दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति ने ग्रामीण छात्रों के लिए एक छात्रवृत्ति कार्यक्रम भी शुरू किया, जिसे श्री क्षेत्र धर्मस्थल ग्रामीण विकास परियोजना (एसकेडीआरडीपी) या 'ज्ञान दीपा परियोजना' कहा जाता है। 
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