सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी 84 वर्षीय बुजुर्ग का डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया है। 14 वर्षीय नाबालिग के जन्मे बच्चे के जैविक पिता का पता लगाने के लिए यह निर्देश दिया गया है।वहीं, जेल में बंद आरोपी का कहना है कि उसकी उम्र यह प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि वह यौन संबंध बनाने में असमर्थ है। हालांकि पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा कुछ नहीं पाया गया जिससे प्रमाणित हो कि आरोपी यौन संबंध बनाने में सक्षम नहीं है।
आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आरोपी को जमानत देने की अपील करते हुए कहा, बुजुर्ग मानसिक और जैविक तौर से यौन संबंध बनाने में असमर्थ है और कई बीमारियों से ग्रस्त है। वह खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए डीएनए समेत किसी भी टेस्ट से गुजरने के लिए तैयार है।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील लिज मैथ्यू ने पुलिस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी यौन संबंध बनाने में सक्षम है। पीड़िता से जन्मे बच्चे के जैविक पिता का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट जरूरी है। इस पर सिब्बल ने कहा कि टेस्ट जल्द से जल्द करवाया जाए क्योंकि उनका मुवक्किल 12 मई से बंद है और उसकी तबीयत बिगड़ रही है।
इसके बाद पीठ ने डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया। इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया था। आरोपी बुजुर्ग का कहना है कि उसे जानबूझकर इस मामले में फंसाया जा रहा है। उसका कहना है कि पीड़ित परिवार उनका किरायेदार है और किराये के विवाद को लेकर उसे फंसाने की साजिश रची गई है।