दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत (फाइल)
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सशस्त्र बलों के कर्मियों के डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के हिस्से के रूप में रक्त के नमूने चरणबद्ध तरीके से एकत्र किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया से अब तक 12 मामलों में शवों की पहचान करने में मदद मिली है। इसमें वह हेलीकॉप्टर दुर्घटना भी शामिल है, जिसमें तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की मौत हो गई थी। सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह ने सोमवार को यह बात कही।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह पुणे स्थित सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) के प्लेटिनम जयंती समारोह के इतर पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें एएफएमसी के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में रखे गए भंडार में संग्रहित करने के लिए रक्त के नमूनों को श्रेणीबद्ध तरीके से एकत्र किया जा रहा है। उन्होंने बताया, डीएनए प्रोफाइलिंग में आप किसी व्यक्ति के रक्त की एक बूंद लेते हैं। इसे एक विशेष फिल्टर पेपर पर डालते हैं और इसे संरक्षित करते हैं। बाद में, यदि आप किसी कारण से उस व्यक्ति की पहचान करना चाहते हैं, जैसे कि दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के समय तो उसके नमूने को भंडार से प्राप्त कर सकते हैं और शवों से बरामद डीएनए के साथ इसका मिलान कर सकते हैं।
उन्होंने बताया, अब तक 12 मामलों में इस तकनीक का उपयोग करके पार्थिव शरीरों की पहचान की गई है, जिनमें जनरल बिपिन रावत को ले जा रहे हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए लोग भी शामिल हैं। 8 दिसंबर, 2021 को तमिलनाडु के नीलगिरी क्षेत्र में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जनरल रावत और उनकी पत्नी सहित 13 लोगों की मौत हो गई थी। तमिलनाडु के नीलगिरी इलाके में 8 दिसंबर 2021 को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत 13 अन्य लोगों की मौत हो गई थी।
'डॉक्टर पायलट' परियोजना के बारे में सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य डॉक्टरों के लिए पायलटों के सामने आने वाली समस्याओं को समझना है। उन्होंने कहा, 'पहले डॉक्टरों को उचित प्रशिक्षण मिलता था और वे पायलट बन जाते थे और अब इस परियोजना के फिर से शुरू होने के बाद वे (उचित प्रशिक्षण प्राप्त करना) जारी रखेंगे।' उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को रोक दिया गया था, लेकिन अब, एक व्यवस्थित तरीके से इसे फिर से शुरू किया जाएगा।